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Page-3 गद्य-साहित्य का विकास हिन्दी गद्य का स्वरूप मानव को अभिव्यक्ति की अद्भुत क्षमता प्रकृति से मिली है। भाषा के माध्यम से वह अपने विचारों, भावों, अनुभूतियों आदि को दो प्रकार से व्यक्त करता है- गद्य रूप में तथा पद्य रूप में। मानवीय अभिव्यक्ति के इन दो रूपों को हम क्रमशः (1) गद्य साहित्य और (2) पद्य (काव्य) साहित्य कहते हैं। गद्य हमारे दैनिक जीवन में प्रयुक्त होनेवाली भाषा का नाम है और उसका छन्दबद्ध रूप, पद्य या काव्य कहलाता है। गद्य और काव्य की विषयवस्तु, भाषा, शैली आदि में बहुत अन्तर है। गद्य के मुख्य विषय हमारे दैनिक कार्य-कलाप, ज्ञान-विज्ञान, कथा, वर्णन एवं व्याख्या आदि हैं। जबकि काव्य के विषय बहुत कुछ काल्पनिक हैं और छन्दबद्ध हैं। 'गद्य' में अपने विचारों एवं भावों को अभिव्यक्त करना अपेक्षाकृत सरल होता है। कोई भी व्यक्ति इसका प्रयोग काव्य की अपेक्षा अधिक सरलता से कर सकता है, क्योंकि यह छन्दबद्धता आदि से मुक्त रहता है। गद्य का लक्ष्य विचारों या भावों को सहज, सरल तथा सामान्य भाषा में विशेष प्रयोजन सहित प्रकट करना है। गद्य की भाषा पूर्ण रूप से, व्या...