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Very short questions -2

 Q.बोर्स्टल संस्थाएँ Answer:-बोर्स्टल संस्थाओं आशय ऐसी संस्थाओं से है जहाँ कम आयु के अपराधियों को रखा जाता है, ताकि उन्हें दंड देने के बजाय सुधार कर समाज का अच्छा नागरिक बनाया जा सके। इस प्रणाली की शुरुआत इंग्लैंड के Borstal नामक स्थान से हुई थी, इसलिए इन्हें “बोर्स्टल संस्थाएँ”भी कहा जाता है। यहां कम आयु के अपराधियों से आशय ऐसे अपराधियों से है जिनकी उम्र सामान्यतः 15 से 21 वर्ष होती है। Q.खुली जेल व्यवस्था क्या है? Answer:-खुली जेल व्यवस्था से आशय ऐसी जेल व्यवस्था से है जहां कैदियों को सामान्य जेलों की अपेक्षा अधिक स्वतंत्रता दी जाती है।तथा इस प्रकार की जेलों में कैदियों को शिक्षा तथा प्रशिक्षण के माध्यम से सुधारने का प्रयास किया जाता है। भारत की पहली खुली जेल lukhnow में स्थापित की गई थी। तथा भारत में वर्तमान समय में कुल 91 खुली जेल हैं। Q.टार्डे का अनुकरण का सिद्धान्त Answer:-Tarde अपराधशास्त्र की समाजशास्त्रीय शाखा (Sociological School of Criminology) के समर्थक हैं। टार्डे के अनुकरण का सिद्धान्त को अंग्रेजी में Tarde's Theory of Imitation कहते हैं टार्डे का अनुकरण का सिद्धान्त ...

Very short questions

 प्रश्न1:- अपराधी कौन है? और यह कितने प्रकार के होते हैं? उत्तर: अपराधी का अर्थ अपराध एक अवैधानिक कृत्य तथा लोक दोष है। जिससे समाज को आघात पहुँचता है और विधान द्वारा दण्डनीय होता है। और ऐसा व्यक्ति जो कि अपराध करता है, अपराधी कहलाता है। अपराधियों का वर्गीकरण अपराधियों के वर्गीकरण के सम्बन्ध में विभिन्न विद्वानों में भिन्न-भिन्न मतभेद रहे हैं। लेकिन कुछ प्रसिद्ध विद्वानों ने अपराधियों को निम्नलिखित भागों में वर्गीकृत किया है: 1. लोमब्रोसो के अनुसार वर्गीकरण:लोमब्रोसो ने अपराधियों को निम्नलिखित भागों में वर्गीकृत किया है: (i) जन्मजात अपराधी: ऐसे व्यक्ति जो जन्म से ही अपराधी होते हैं, जन्मजात अपराधी कहलाते हैं। (ii) पागल अपराधी: ऐसे व्यक्ति जो पागलपन के कारण अपराधी होते हैं, पागल अपराधी कहलाते हैं। (iii) आवेगयुक्त अपराधी: ऐसे व्यक्ति जो आवेग के कारण अपराध कर बैठते हैं, आवेगयुक्त अपराधी कहलाते हैं। प्रश्न 2: परिवीक्षा (Probation) किसे कहते हैं? उत्तर: परिवीक्षा को अंग्रेजी में (Probation) कहते हैं। जिसका अर्थ है— अपराधी को सजा के बदले शर्तसहित मुक्त कर देना। साधारण शब्दों में— परिवीक्ष...

मृत्युदण्ड

 Q. मृत्युदण्ड के पक्ष तथा विपक्ष में तर्क दीजिए ? क्या यह संवैधानिक है? Answer: मृत्यु दण्ड के तरीके मृत्यु दण्ड के विभिन्न तरीके निम्नलिखित हैं। 1.दम घोंटकर: इसमें अपराधी के शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी जाती थी, ताकि दम घुटने के कारण उसकी मौत हो जाए। 2.सूली पर टांगकर: जो व्यक्ति मासूम लोगों की बर्बरतापूर्ण ढंग से हत्या करता था, उसे सूली पर टांग कर मृत्युदण्ड दिया जाता था ताकि उसे यह अहसास हो कि जिस व्यक्ति को उसने यातना देकर मार डाला है, उसे कितना कष्ट हुआ होगा। 3.कुचलकर 4.तलवार या कुल्हाड़ी से सिर कलम 5.पत्थरों से प्रहार करके भारतीय न्याय संहिता, 2023 में कुछ गंभीर अपराधों के लिए मृत्युदण्ड अथवा आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है। ये अपराध निम्नलिखित हैं— 1.भारत की संप्रभुता, एकता और अखण्डता के विरुद्ध युद्ध छेड़ना — धारा 147 2.विद्रोह का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप युद्ध किया जाए — धारा 160 3.मृत्युदण्ड से दण्डनीय अपराध के लिए मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना — धारा 229 4.हत्या — धारा 103 5.बालक अथवा विक्षिप्त व्यक्ति को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करना ...

भारतीय कारागार व्यवस्था

 Q.'भारतीय कारागार व्यवस्था' के दोषों को बताइए तथा उसमें सुधार के लिए कुछ उपायों का सुझाव दीजिए। Answer:- कारागार का अर्थ कारागार (Jail/Prison) से आशय ऐसे स्थान से है जहाँ अपराधियों को न्यायालय द्वारा दण्डित किए जाने के बाद रखा जाता है। कारागार  का प्रमुख उद्देश्य अपराधियों को दण्ड देना, सुधार करना तथा समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारतीय कारागार व्यवस्था के दोष भारतीय कारागार व्यवस्था के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं। 1. अधिक भीड़ (Overcrowding): -भारतीय कारागार व्यवस्था का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण दोष यह है कि यहां अधिक भीड़ रहती है  जिसके कारण रहने,खाने  एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। 2. अधिक विचाराधीन कैदियों की  संख्या: -भारतीय कारागार व्यवस्था का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण दोष यह है कि यहां विचाराधीन कैदियों की  संख्या अधिक हैं। क्योंकि क्योंकि कई कैदी हमारे देश में ऐसे होते हैं जिनका मामला अदालत में वर्षों तक लम्बित पड़ा रहता है और वो कारागार में बंद रहते हैं। 3. सुधारात्मक सुविधाओं की कमी:- भारतीय कारागार व्य...

किशोर अपचारिता / बाल अपराध (Juvenile delinquency)

बाल अपराध का अर्थ बाल अपराध एक बालक द्वारा किया गया अवैधानिक कृत्य तथा लोक दोष है जिससे समाज को आघात पहुँचता है और विधि द्वारा दंडनीय होता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि बालक अधिनियम 1960 के अंतर्गत 16 वर्ष से कम आयु के लड़के और 18 वर्ष से कम आयु की लड़की को बालक माना गया है। बाल अपराध के कारण बाल अपराध के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं: 1. पारिवारिक कारण :- बच्चे पर परिवार का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है क्योंकि जिन बच्चों के परिवार विघटित, अर्ध-विघटित, अनैतिक वातावरण के साथ-साथ मनोरंजन की कमी वाले होते हैं, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों में अग्रसर हो जाते हैं। A.विघटित घर:-जिन बच्चों के परिवार विघटित होते हैं, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं। B.अर्धविघटित घर:- जिन बच्चों के परिवार अर्धविघटित होते हैं, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं। C.अनैतिक वातावरण:- जिन बच्चों के परिवार अनैतिक वातावरण वाले होते हैं, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं। D. माता-पिता द्वारा उपेक्षा किया जाना:- जिन बच्चों के माता-पिता बच्चो...

श्वेतपोश अपराध

 श्वेतपोश अपराध का अर्थ  श्वेतपोश अपराध से आशय ऐसे अपराध से है जो प्रतिष्ठित व्यक्ति द्वारा अपने व्यवसाय के दौरान किया जाता है। For example:- विधि का उल्लंघन करके अनुचित लाभ प्राप्त करना । श्वेतपोश अपराध की विशेषताएँ  श्वेतपोश अपराध की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:  1. श्वेतपोश अपराध प्रतिष्ठित व्यक्ति द्वारा किया जाता है।  2. श्वेतपोश अपराध व्यवसाय के दौरान किया जाता है।  3. श्वेतपोश अपराधों का प्रमुख उद्देश्य अनुचित लाभ प्राप्त करना होता है।  4. श्वेतपोश अपराधों में विधि का उल्लंघन होता है।  श्वेतपोश अपराध के प्रकार  श्वेतपोश अपराध के प्रकार निम्नलिखित हैं:  1.Hacking. 2.Fraud 3.Tax evasion 4.Insider Trading  श्वेतपोश अपराध के कारण  (Causes of White Collar Crime)  इन अपराधों के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:  1. स्वार्थवाद - जब व्यक्ति स्वार्थ में डूब जाता है तो उस दशा में वह बड़े से बड़ा अपराध भी कर बैठता है।  2. अपर्याप्त दंड - श्वेतपोश अपराधियों को पर्याप्त मात्रा में दंड नहीं दिया जाता है यही कारण है कि इस प्रकार ...

संगठित अपराध

 संगठित अपराध का अर्थ  संगठित अपराध से आशय ऐसे अपराध से है जो कि दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा नियोजित ढंग से संगठित होकर किया जाता है।  ध्यान देने योग्य बात यह है कि संगठित अपराध की प्रक्रिया प्रायः गोपनीय रहती है।  इसके अन्तर्गत चोरी, जुआ, तस्करी, वेश्यावृत्ति, जालसाजी, डकैती आदि को सम्मिलित किया जाता है।  संगठित अपराध के लक्षण  संगठित अपराध के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:  1. दो या दो से अधिक व्यक्ति: संगठित अपराध के लिए कम से कम दो व्यक्तियों का होना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि अकेला कोई भी एक व्यक्ति संगठित अपराध नहीं कर सकता है।  2.नियोजित ढंग:- संगठित अपराध के लिए नियोजित ढंग का होना अत्यंत आवश्यक है।  3.संगठन / कार्य विभाजन:- संगठित अपराध के लिए संगठन / कार्य विभाजन का होना अत्यंत आवश्यक है।  4.गोपनीयता:- संगठित अपराध के लिए गोपनीयता का होना अत्यंत आवश्यक है।  Note:- ध्यान देने योग्य बात यह है कि Indian Penal Code, 1860 (IPC) में “organised crime” और “petty organised crime” को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया था ...