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Showing posts from April, 2026

अभद्र प्रदर्शन (निषेध) अधिनियम, 1986

 Q.अभद्र प्रदर्शन (निषेध) अधिनियम, 1986 के उद्देश्यों एवं प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिये। प्रस्तावना (Introduction) भारत में महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए और विज्ञापनों, प्रकाशनों, लेखों या चित्रों के माध्यम से महिलाओं के अश्लील चित्रण को रोकने के लिए अभद्र प्रदर्शन (निषेध) अधिनियम, 1986 बनाया गया। यह अधिनियम 2 अक्टूबर 1987 से पूरे भारत में लागू हुआ। इस कानून से पहले विभिन्न कानूनों में प्रावधान तो थे, लेकिन महिलाओं के "अभद्र प्रदर्शन" को विशेष रूप से परिभाषित नहीं किया गया था। इस अधिनियम के आने के बाद अब किसी भी माध्यम से महिलाओं का ऐसा चित्रण करना अपराध है जो उनके सम्मान को ठेस पहुँचाए। परिभाषाएं  अभद्र प्रदर्शन (निषेध) अधिनियम, 1986 में दो गई प्रमुख परिभाषाएं निम्नलिखित हैं। 1. अभद्र प्रदर्शन (Indecent Representation):-अभद्र प्रदर्शन (निषेध) अधिनियम, 1986 के अनुसार अभद्र प्रदर्शन से आशय किसी महिला के रूप, उसके शरीर या उसके किसी अंग को इस प्रकार चित्रित करने से है जिससे उसका प्रभाव अश्लील हो या जो लोक नैतिकता (Public Morality) को बिगाड़ने वाला हो। For Example:-विज्ञ...

सांप्रदायिकता और आतंकवाद

 Q.सांप्रदायिकता और आतंकवाद जैसे सामाजिक समस्य का आधुनिक संदर्भ में मूल्यांकन कीजिए। सांप्रदायिकता का अर्थ सांप्रदायिकता से आशय ऐसी स्थिति से है, जब लोग धर्म या सम्प्रदाय के आधार पर आपस में भेदभाव, घृणा तथा शत्रुता की भावना रखने लगते हैं। For example:-धर्म के नाम पर दंगे होना एक समुदाय का दूसरे समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाना राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का उपयोग आतंकवाद का अर्थ आतंकवाद को अंग्रेजी में 'Terrorism' कहते हैं। जिसका अर्थ है राजनीतिक कारणों से आम जनता की हत्या करना और ऐसा व्यक्ति जो कि आतंक फैलाता है 'आतंकवादी' अर्थात् 'Terrorist' कहलाता है। For exa:- उरी, नगरोटा, पुलवामा के आतंकवादी हमलों ने पूरे भारत को हिलाकर रख दिया था। वैश्विक आतंकवाद के रूप वैश्विक आतंकवाद के प्रमुख रूप निम्नलिखित हैं। 1. मानव बम:- मानव बम वैश्विक आतंकवाद का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण रूप है। साधारण शब्दों में मानव बम से आशय ऐसे मानव बम से है। जो कि लगभग अपनी कमर से लगभग 8 आठ दस किलो RDX बांधकर घूमता है। और केवल एक छोटा सा बटन दबाकर विस्फोट कर देते हैं। वैश्विक स्तर पर काफी सारे ऐसे संग...

काकोरी काण्ड और लाहौर काण्ड

यह मामला लखनऊ के पास काकोरी नामक स्थान पर गठित हुआ। जिसके अन्तर्गत लखनऊ जाने वाली मालगाड़ी में रखे सरकारी खजाने को लूट लिया गया। इस मामले में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, रोशन लाल तथा राजेन्द्र लाहिड़ी को फांसी दे दी गई।  काकोरी काण्ड में 'हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन' के अधिकांश नेता भी गिरफ्तार कर लिए गए जिसके बाद  इस संगठन का अस्तित्व लगभग समाप्त हो गया। ध्यान देने योग्य बात यह है कि हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' की स्थापना सन् 1924 ई० में कानपुर में की गई थी। तथा बिहार, उ०प्र०, दिल्ली, पंजाब, मद्रास ,बंगाल आदि प्रान्तों में इसकी शाखाएँ थीं। इसके प्रमुख विचार निम्नलिखित थे— 1.भारतीय जनता को यह समझना कि केवल Mahatma Gandhi की अहिंसावादी नीतियों से स्वतंत्रता प्राप्त करना कठिन है। 2.पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए प्रत्यक्ष कार्यवाही तथा क्रान्ति की आवश्यकता का प्रदर्शन करना। कुछ समय पश्चात् इस काण्ड के एक मात्र बचे क्रांतिकारी सदस्य चन्द्रशेखर आजाद ने दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में एक बैठक की और यहीं पर 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' की ...

अपराध शास्त्र

अपराध शास्त्र का अर्थ  अपराध शास्त्र को अंग्रेजी में criminology कहते है जो कि दो शब्दों से मिलकर बना है अपराध + शास्त्र इसलिए अपराध शास्त्र ज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत अपराध तथा अपराधी का अध्ययन किया जाता है.  वास्तव में अपराध शास्त्र का यह अर्थ बहुत ही संकुचित है । प्रसिद्ध अपराधशास्त्री teft ने अपराधशास्त्र को दो रूपों में प्रयुक्त किया है। 1. विस्तृत रुप में - अपराधशास्त्र वह विज्ञान है जिसके अन्तर्गत अपराध की व्याख्या के साथ-साथ अपराधियों को दिए जाने वाले दण्ड को भी शामिल किया जाता है.  2. संकीर्ण रुप में - अपराध शास्त्र अपराध की व्याख्या करता है.  अपराध शास्त्र की परिभाषा अपराध शास्त्र की परिभाषा के सम्बन्ध में विभिन्न विद्वानों में भिन्न-भिन्न मतभेद रहे है अर्थात अपराध शास्त्र के सम्बन्ध में प्रमुख विद्वानों द्वारा दी गयी प्रमुख परिभाषा निम्नलिखित है -  सदरलैंड के अनुसार:- अपराध शास्त्र ज्ञान की वह शाखा है जो अपराध का अध्ययन एक सामाजिक घटना के रूप में करती है।  रैकलेस के अनुसार:- अपराधशास्त्री जिसका अध्ययन करते हैं वही अपराध शास्त्र है।  ...

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 /मानवाधिकार आयोग

Q.राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की संरचना, कार्य व शक्तियों की विवेचना कीजिए। भारत में मानव अधिकार संरक्षण में आयोग ने क्या भूमिका अदा की है?  प्रस्तावना Introduction मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम का पूरा नाम मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 है। जो कि 28th September 1993 से सम्पूर्ण भारत में लागू होता है।  इस अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग तथा मानव अधिकार न्यायालयों की स्थापना करना है। परिभाषाएं  Definitions  मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 में दी गई प्रमुख परिभाषाएं निम्नलिखित हैं। 1.मानव अधिकार(Human rights)- मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अनुसार " मानव अधिकार से आशय ऐसे अधिकार से है जो अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सम्मिलित हैं, संविधान में सम्मिलित हैं, और न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय (enforceable) हैं ।". राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग National human rights commission राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अंग्रेजी में National human rights commission कहते हैं। जिसे संक्षेप में NHRC के नाम से भी जाना ज...

Portia

 Q. Why does Portia delay the trial and play with Shylock despite knowing the legal loophole? Answer: Portia’s delay in the trial scene of The Merchant of Venice has been widely discussed by critics, and it can be explained from multiple perspectives: 1. Dramatic Necessity From a literary point of view, the delay is essential to create suspense and tension. If Portia had immediately revealed the legal loophole, the trial would lose its dramatic impact. The prolonged argument builds up to the climax, making the scene more engaging and powerful. 2. Moral Purpose Portia aims not only for a legal victory but also a moral victory. She tries to persuade Shylock to show mercy, emphasizing that the spirit of law should prevail over its letter. Her famous plea for mercy reflects her desire to reform Shylock rather than merely defeat him. 3. Display of Intellectual Superiority Portia’s conduct also reflects her confidence and intellectual brilliance. By prolonging the trial, she demonstrates...

Character Sketch of Antonio

1. Main hero of the play Antonio is the main character of The Merchant of Venice. Without Antonio, the story would not progress properly. In the end, everything becomes happy for him. 2. Kind-hearted person Antonio is a very kind and helpful man. Everyone (except Shylock) respects him for his goodness. He helps his friend Bassanio even when it puts his own life in danger. He also lends money without charging interest, which shows his generosity. 3. Rich merchant Antonio is a wealthy businessman. He owns many ships that trade across the seas. Even though he is rich, he is not selfish. He helps people in need and never shows off his wealth . 4. True and loyal friend Antonio is a very loyal friend. He loves Bassanio deeply and is ready to sacrifice everything for him. He signs a dangerous bond just to help his friend, which proves his strong friendship. 5. Sad and depressed nature Antonio is often sad without any clear reason. From the beginning of the play, he feels unhappy and lost. E...

रामकृष्ण मिशन/रामकृष्ण परमहंस/स्वामी विवेकानंद

Q.रामकृष्ण मिशन' पर विस्तृत आलेख दीजिए। भूमिका (Introduction) रामकृष्ण मिशन एक प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक संस्था है, जिसकी स्थापना स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में की थी। यह मिशन रामकृष्ण परमहंस के उपदेशों एवं आदर्शों पर आधारित है। इसका उद्देश्य मानव सेवा करना है। रामकृष्ण परमहंस का परिचय रामकृष्ण परमहंस का जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के हुगली जिले में हुआ था। इनके पिता का नाम खुदीराम चट्टोपाध्याय तथा माता का नाम चंद्रमणि देवी था। इनका वास्तविक नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था। इन्होंने औपचारिक शिक्षा कम प्राप्त की, परंतु आध्यात्मिक साधना के माध्यम से ज्ञान प्राप्त किया। इन्होंने दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पुजारी के रूप में कार्य किया तथा सभी धर्मों की एकता का संदेश दिया। स्वामी विवेकानंद का परिचय स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। इनके पिता विश्वनाथ दत्त तथा माता भुवनेश्वरी देवी थीं। इनका बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। इन्होंने स्कॉटिश चर्च कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। वे रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य थे और उन्होंने 1893 में शिकागो के विश्व धर्म सं...

Fundamental Duties / Constitutional Duties

Q. Make the fundamental duties of Indian citizens, which are mentioned in the Indian Constitution.  Answer:-Previously, fundamental rights were mentioned in the Indian Constitution, but there was no mention of fundamental duties. At that time, it was criticized on this basis that fundamental rights have no value in the absence of fundamental duties. To avoid this criticism, the 42nd Constitutional Amendment was done in the year 1976. Through which some fundamental duties were mentioned, which are as follows:  (1) It is the duty of every citizen that they should follow the Constitution.  (2) It is the duty of every citizen that they should respect the national flag and the national anthem.  (3) It is the duty of every citizen that they should protect the sovereignty, unity, and integrity of India.  (4) It is the duty of every citizen that they should defend the country.  (5) It is the duty of every citizen that they should build a feeling of brotherhood....

सुभाष चन्द्र बोस

 Q.सुभाष चन्द्र बोस का देशभक्त के रूप में मूल्यांकन कीजिए। Answer:-सुभाष चन्द्र बोस जन्म नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 में हुआ था. इनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस तथा माता का नाम प्रभावती देवी था। इनके पिता पेशे से वकील थे। इनकी पत्नी का नाम एमिली शेंकल था।तथा इनकी बेटी का नाम अनीता बोस है। शिक्षा सुभाष चन्द्र बोस की प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूलों में हुई थी।तथा इन्होंने उच्च शिक्षा University of Cambridge में प्राप्त की थी। उन्होंने Indian Civil Services (ICS) परीक्षा पास की, लेकिन देश सेवा के लिए नौकरी छोड़ दी। जिसे वर्तमान समय में Civil Services Examination - CSE के नाम से जाना जाता है। अनुभव सुभाष चन्द्र बोस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक महत्वपूर्ण नेता थे। जो कि आगे चलकर Indian National Congress के अध्यक्ष भी बने। उपलब्धियां सुभाष चन्द्र बोस ने Indian National Army (आज़ाद हिंद फौज) भी बनाई । तथा अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा दिया। तथा तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” जैसे प्रेरणादायक नारे दिए। तथा भारत की स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा...