मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 /मानवाधिकार आयोग
Q.राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की संरचना, कार्य व शक्तियों की विवेचना कीजिए। भारत में मानव अधिकार संरक्षण में आयोग ने क्या भूमिका अदा की है?
प्रस्तावना
Introduction
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम का पूरा नाम मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 है।
जो कि 28th September 1993 से सम्पूर्ण भारत में लागू होता है।
इस अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग तथा मानव अधिकार न्यायालयों की स्थापना करना है।
परिभाषाएं
Definitions
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 में दी गई प्रमुख परिभाषाएं निम्नलिखित हैं।
1.मानव अधिकार(Human rights)- मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अनुसार " मानव अधिकार से आशय ऐसे अधिकार से है जो अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सम्मिलित हैं, संविधान में सम्मिलित हैं, और न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय (enforceable) हैं ।".
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
National human rights commission
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अंग्रेजी में National human rights commission कहते हैं। जिसे संक्षेप में NHRC के नाम से भी जाना जाता है। जिसकी स्थापना 12 अक्टूबर, 1993 को मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अन्तर्गत की गई है।
इसका मुख्यालय दिल्ली में है तथा अन्य कार्यालय भारत में विभिन्न स्थानों पर हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन
NHRC का गठन एक अध्यक्ष तथा अन्य 5 सदस्यों से मिलकर होता है ।
NHRC का अध्यक्ष केवल वही व्यक्ति हो सकता है जो कि उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश हो अथवा उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो ।
NHRC का एक सदस्य केवल वही व्यक्ति हो सकता है जो कि उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो।
NHRC का एक सदस्य केवल वही व्यक्ति हो सकता है जो कि उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो।
NHRC के दो सदस्य केवल वही व्यक्ति हो सकता है जो कि उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कार्य और शक्तियाँ
(Duties and powers of National human rights commission)
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रमुख कार्य और शक्तियाँ निम्नलिखित हैं।
1.राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित सभी मामलों की जाँच करने का अधिकार दिया गया है।
2.राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित सभी न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार दिया गया है।
3.राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को किसी भी जेल का दौरा करने का अधिकार दिया गया है।
4.राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को जेल में बंद कैदियों की स्थिति का निरीक्षण करने का अधिकार दिया गया है।
राज्य मानवाधिकार आयोग
(State human rights commission)
राज्य मानवाधिकार आयोग कोअंग्रेजी में State human rights commission कहतेहैं। जिसे संक्षेप में SHRC के नाम से भी जाना जाता है।
इसका मुख्यालय ऐसे स्थान पर होगा जो कि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करके घोषित किया जाएगा।
राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन
राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन एक अध्यक्ष, एक सचिव तथा चार अन्य सदस्यों से मिलकर होता है।
इसका अध्यक्ष केवल वही व्यक्ति हो सकता है जो कि उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो।
इसका एक सदस्य केवल वही व्यक्ति हो सकता है जो कि उच्च न्यायालय का न्यायाधीश हो या रहा हो।
इसका एक सदस्य केवल वही व्यक्ति हो सकता है जो कि उस राज्य के किसी जिले का जिला न्यायाधीश हो या रहा हो।
इसके दो सदस्य केवल वही व्यक्ति हो सकते हैं जिन्हें मानवाधिकारों से संबंधित विषयों पर ज्ञान हो।
मानवाधिकार न्यायालय
Human rights court
मानवाधिकार न्यायालय को अंग्रेजी में Human rights court कहते हैं।
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के धारा 30 के अनुसार," राज्य सरकार मानवाधिकारों से संबंधित मामलों के निवारण के लिए अधिसूचना जारी करके प्रत्येक जिले के लिए एक सेशन न्यायालय को मानवाधिकार न्यायालय के रूप में निर्धारित कर सकती है लेकिन ऐसा करने से पहले उसे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति लेनी होगी।
Comments
Post a Comment