मौर्य साम्राज्य
Q.मौर्य साम्राज्य की सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer:-चन्द्रगुप्त ने नन्दवंश के अन्तिम शासक को हराकर मौर्य वंश की स्थापना की थी।
उसके पश्चात् सेल्यूलस ने भारत पर आक्रमण किया । जिसे फिर से चन्द्रगुप्त ने हरा दिया ।
चन्द्रगुप्त के बाद, उनका बेटा बिन्दुसार गद्दी पर बैठा। बिन्दुसार के बाद उसका बेटा अशोक सम्राट बना।
चन्द्रगुप्त मौर्य ने जो साम्राज्य स्थापित किया था उसमें से कलिंग स्वतंत्र हो गया था अतः अब अशोक के समाने सबसे बड़ी चुनौती कलिंग को जीतना था।
जिसके लिए उसने कलिंग का युद्ध लड़ा। जिसमें वह बहुत बुरी तरह से हारा । उसके बाद उसने यह तय किया कि वह भविष्य में कोई युद्ध नहीं लड़ेगा। क्योंकि इस युद्ध में उसके लाखों लोग मारे गए थे और लाखों लोगों को बंदी बनाया गया था।
इसके पश्चात अशोक ने अपने राज्य में जगह-जगह पर लम्बे लम्बे खम्भे गड़वाए। और इन खम्भों पर वहाँ के अधिकारियों व लोगों के लिए अपने संदेश भी खुदवाए ताकि लोग उसकी बातों पर ध्यान दे सकें।
खम्बों पर खुदे उसके संदेशों से हम अशोक के समय की कई बातें जान सकते हैं।
उसने लिखवाया कि 'हर किस्म के लोगों पर युद्ध का बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे मैं बहुत दुःखी हूँ। इस युद्ध के बाद मैंने मन लगाकर धर्म का पालन किया है और दूसरों को यही सिखाया है।"
"मैं मानता हूँ कि धर्म से जीतना युद्ध से जीतने से अच्छा है। मैं यह बातें खुदवा रहा हूँ ताकि मेरे बेटे और पोते भी युद्ध करने के बारे में न सोचें और धर्म फैलाने की बात सोचें।"
उसने जीवन के बारे में प्रजा को सही राह दिखाने के लिए अलग से अधिकारी रखे जिन्हें धम्म महामात्र कहा गया। उनका काम था कि वे गाँव-गाँव, नगर-नगर जाकर लोगों को सही व्यवहार की बातें बताएं।
और इतना ही नहीं बल्कि अशोक ने अपने पुत्र महेन्द्र और बेटी संघमित्रा को अपने संदेश के प्रचार के लिए श्रीलंका भी भेजा।
Note:-मौर्यों के विशाल प्रशासन तंत्र के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए हम मेगस्थनीज की इण्डिका और कौटिल्य (चाणक्य) के अर्थशास्त्र पुस्तकों का अध्ययन कर सकते हैं।
मौर्य साम्राज्य की विशेषताएं
मौर्य साम्राज्य की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं।
1.सम्राट-मौर्य साम्राज्य की पहली तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसके अन्तर्गत सम्राट का सबसे अधिक महत्व था। वह सम्पूर्ण साम्राज्य का सर्वोच्च पदाधिकारी था।
समस्त उच्च पदाधिकारियों नियुक्ति उसी के द्वारा की जाती थी।असन्तुष्ट होने पर सम्राट इन्हें उनके पद से हटा भी सकता था।
विदेशों में अपने राजदूत की नियुक्ति सम्राट के द्वारा ही की जाती थी।
वह राज्य का सर्वोच्च न्यायाधीश भी होता था और स्वयं ही मुकदमों का निर्णय भी करता था।
वह सेना का सर्वोच्च सेनापति हुआ करता था।
2.महल-मौर्य साम्राज्य की दूसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसके अन्तर्गत सम्राट सुन्दर महलों में रहते थे। मैगस्थनीज ने लिखा है कि चन्द्रगुप्त का महल लकड़ी का बना हुआ था तथा गंगा और सोन नदियों के संगम पर स्थित था।
और चन्द्रगुप्त किसी भी कमरे में एक रात से अधिक नहीं सोता था।
3.मंत्रिपरिषद:-मौर्य साम्राज्य की तीसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसके अन्तर्गत राजा को कार्यों में सहायता देने के लिये मंत्रिपरिषद का गठन किया गया था जो कि राजा को महत्वपूर्ण विषयों पर राय देने का कार्य करती थी । लेकिन राजा इसे मानने के लिए बाध्य नहीं था।
4.पदाधिकारी:- मौर्य साम्राज्य की चौथी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसके अन्तर्गत देश को चलाने के लिये अनेक अधिकारियों की नियुक्ति की जाती थी।
5.न्याय व्यवस्था :-मौर्य साम्राज्य की पांचवीं तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसके अन्तर्गत राजा न्याय का प्रधान पदाधिकारी होता था।
मैगस्थनीज ने लिखा है कि चन्द्रगुप्त मौर्य दिन भर अपने दरबार में बैठा न्याय का कार्य करता था।
6.गुप्तचर विभाग(Intelligence Department):- मौर्य साम्राज्य की छठी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसके अन्तर्गत गुप्तचर विभाग में स्त्री और पुरुष दोनों को नियुक्त किया जाता था। जो राजा को देश-विदेश की समस्त घटनाओं से परिचित रखते थे।
7.सैन्य व्यवस्था:-मौर्य साम्राज्य की सातवीं तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसके अन्तर्गत मौयों के पास एक विशाल सेना थी और उसी को सहायता से चाणक्य और चन्द्रगुप्त मौर्य ने मिलकर शक्तिशाली नन्दवंश का विनाश किया था।
मौर्य सेना में अत्यधिक अनुशासन था।
8.राज्य की आय तथा व्यय-मौर्य साम्राज्य की आठवीं तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसके अन्तर्गत भूमि कर राज्य की आय का प्रमुख साधन था।
चुंगियों से भी कर प्राप्त होता था।
खानों, जंगलों, पुलों तथा नदियों के प्रयोग के लिये भी कर लिया जाता था।
बिक्री कर तथा जुर्माने से भी सरकार को पर्याप्त आय होती थी।
इसके अतिरिक्त सुनारों, मदिरालयों, बूचड़खानों, कारीगरों तथा वेश्याओं आदि से भी कर लिया जाता था।
जिस प्रकार मौयों की आय बहुत अधिक थी उसी प्रकार उनका व्यय भी बहुत अधिक था।
राज्य परिवार के ऊपर राज्य को बहुत धन खर्च होता था। राज परिवार से सम्बन्धित व्यक्तियों को ऊँचे-ऊँचे वेतन मिलते थे। सम्राट को सेवा के लिए हजारों नौकर रहते थे।
सार्वजनिक हित के कार्यों पर राज्य का बहुत अधिक धन व्यय होता था।
राज्य की ओर से मनुष्यों और पशुओं के लिए चिकित्सालय खोले गये थे।
अनेक सड़कों का निर्माण किया गया था। और उनके दोनों ओर वृक्ष लगाये गये थे। स्थान-स्थान पर कुओं तथा धर्मशालाओं का निर्माण किया गया।
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