किशोर अपचारिता / बाल अपराध (Juvenile delinquency)

बाल अपराध का अर्थ

बाल अपराध एक बालक द्वारा किया गया अवैधानिक कृत्य तथा लोक दोष है जिससे समाज को आघात पहुँचता है और विधि द्वारा दंडनीय होता है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि बालक अधिनियम 1960 के अंतर्गत 16 वर्ष से कम आयु के लड़के और 18 वर्ष से कम आयु की लड़की को बालक माना गया है।

बाल अपराध के कारण

बाल अपराध के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

1. पारिवारिक कारण:- बच्चे पर परिवार का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है क्योंकि जिन बच्चों के परिवार विघटित, अर्ध-विघटित, अनैतिक वातावरण के साथ-साथ मनोरंजन की कमी वाले होते हैं, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों में अग्रसर हो जाते हैं।

A.विघटित घर:-जिन बच्चों के परिवार विघटित होते हैं, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

B.अर्धविघटित घर:- जिन बच्चों के परिवार अर्धविघटित होते हैं, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

C.अनैतिक वातावरण:- जिन बच्चों के परिवार अनैतिक वातावरण वाले होते हैं, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

D. माता-पिता द्वारा उपेक्षा किया जाना:- जिन बच्चों के माता-पिता बच्चों की उपेक्षा करते हैं, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराध की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

E.अनचाही संतान:- जिन बच्चों के परिवार अपने बच्चों को अनचाही संतान बताते हैं, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराध की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

F.मनोरंजन के साधनों में कमी :-जिन बच्चों के परिवार में मनोरंजन के साधनों में कमी होती है, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

G.आर्थिक संकट :-जिन बच्चों के परिवार में आर्थिक संकट होता है, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

H.भीड़-भाड़ वाले परिवार :-जिन बच्चों के परिवार में बहुत भीड़-भाड़ होती है, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

I.मिश्रित संस्कृति:- जिन बच्चों के परिवार मिश्रित संस्कृति वाले होते हैं, उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

2. शारीरिक कारण:- बच्चे पर शरीर का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। क्योंकि जिन बच्चों का शरीर काला तथा विकलांग होता है उन परिवारों के बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

3. मनोवैज्ञानिक कारण - बच्चों पर मनोवैज्ञानिक कारण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। क्योंकि जिन बच्चों को मनोवैज्ञानिक रूप से पीड़ित किया जाता है, वे बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

4. सामाजिक और पर्यावरणीय कारण - बच्चों के परिवेश और सामाजिक वातावरण का उनके विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उचित मार्गदर्शन और सकारात्मक वातावरण की कमी बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।

A.अश्लील साहित्य :- जिन घरों के बच्चे अश्लील साहित्य पढ़ते रहते हैं वे बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

B.रेडियो और टेलीविजन :- मनोरंजन के इन साधनों का अत्यधिक प्रभाव भी बच्चों के व्यवहार पर पड़ता है। वर्तमान समय में मीडिया की भूमिका को भी सामाजिक व्यवहार में बदलाव के लिए उत्तरदायी माना जाता है।

• उदाहरण के लिए:- वेशभूषा, संगीत और विभिन्न प्रदर्शनों का प्रभाव बच्चों की आदतों पर पड़ सकता है।

• नोट:- ब्लूमर व हाउजर के अनुसार "सिनेमा का प्रभाव दर्शकों के व्यवहार पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है।"

C.समाचार पत्र :- समाचार पत्रों में छपने वाली घटनाओं और सूचनाओं का प्रभाव भी पढ़ रहे बच्चों पर पड़ सकता है।

D.शिक्षा :- शिक्षा का अभाव बच्चों को गलत दिशा में ले जा सकता है। इसके साथ ही वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की कुछ चुनौतियाँ भी इसके लिए उत्तरदायी मानी जाती हैं।

• उदाहरण के लिए:- भीड़भाड़, पाठ्यक्रम का बोझिल होना और योग्य शिक्षकों का अभाव।

E.अश्लील साहित्य :- जिन घरों के बच्चे अश्लील साहित्य पढ़ते रहते हैं वे बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

F.रेडियो और टेलीविजन :- मनोरंजन के इन साधनों का अत्यधिक प्रभाव भी बच्चों के व्यवहार पर पड़ता है। वर्तमान समय में मीडिया की भूमिका को भी सामाजिक व्यवहार में बदलाव के लिए उत्तरदायी माना जाता है।

  • उदाहरण के लिए:- वेशभूषा, संगीत और विभिन्न प्रदर्शनों का प्रभाव बच्चों की आदतों पर पड़ सकता है।

  • नोट:- ब्लूमर व हाउजर के अनुसार "सिनेमा का प्रभाव दर्शकों के व्यवहार पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है।"

G.समाचार पत्र :- समाचार पत्रों में छपने वाली घटनाओं और सूचनाओं का प्रभाव भी पढ़ रहे बच्चों पर पड़ सकता है।

H.शिक्षा :- शिक्षा का अभाव बच्चों को गलत दिशा में ले जा सकता है। इसके साथ ही वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की कुछ चुनौतियाँ भी इसके लिए उत्तरदायी मानी जाती हैं।

उदाहरण के लिए:- भीड़भाड़, पाठ्यक्रम का बोझिल होना और योग्य शिक्षकों का अभाव।

5. माता-पिता का व्यक्तित्व - बच्चे पर माता-पिता के व्यक्तित्व का भी प्रभाव पड़ता है क्योंकि जिन बच्चों के माता-पिता का व्यक्तित्व दोषपूर्ण है वे बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

6. संगति - बच्चे पर संगति का भी प्रभाव पड़ता है क्योंकि जिन बच्चों की संगति अपराध प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों की होती है वे बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

7. राजनीतिक कारण - बच्चे पर राजनीतिक कारण का भी प्रभाव पड़ता है क्योंकि जो बच्चे विद्यालयों की हड़तालों में अधिक भाग लेते हैं वे बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

8. भौतिकवादी दृष्टिकोण - बच्चे पर भौतिकवादी दृष्टिकोण का भी प्रभाव पड़ता है क्योंकि जो बच्चे धर्म और अध्यात्म को पिछड़ेपन की बात कहकर उनकी उपेक्षा करते हैं वे बच्चे अक्सर अपराधों की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

बाल अपराध की रोकथाम के उपाय

बाल अपराध की रोकथाम के प्रमुख उपाय निम्न लिखित हैं।

1. परिवार को अपने कर्तव्य और दायित्व का निर्वहन करना चाहिए।

2. मनोरंजन के साधन जुटाने चाहिए।

3. नैतिक शिक्षा देनी चाहिए।

4. आर्थिक स्थिति को अच्छा करना चाहिए।

5. बाल सुधार गृह स्थापित किये जाने चाहिए।

6. मनोवैज्ञानिक अस्पताल स्थापित किये जाने चाहिए।

7. बाल न्यायालय स्थापित किए जाने चाहिए।

8. पुलिस को विशेष परीक्षण दिया जाना चाहिए। 

Comments

Popular posts from this blog

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 /मानवाधिकार आयोग

मौर्य साम्राज्य