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Showing posts from January, 2026

शिवाजी/मराठा

 Q.शिवाजी के प्रशासन की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें। Answer:-शिवाजी का जन्म शिवनेर के दुर्ग/मजबूत किला में हुआ था। इनके पिता का नाम शाहजी भोंसले और माता का नाम जीजाबाई था।  शिवाजी ने  सूरत पर आक्रमण करके बहुत सारी सम्पत्ति इकट्ठी कर ली। शिवाजी का रायगढ़ में एक पंडित ने राज्याभिषेक किया था  जिसमें उन्हें छत्रपति की उपाधि से नवाजा गया था।  1680 ई० में शिवाजी की मृत्यु हो गयी। शिवाजी एक कुशल सैनिक, योग्य सेनापति तथा लोकप्रिय शासक थे। शिवाजी ने अपनी योग्यता के आधार पर मराठों को संगठित किया तथा अलग से एक 'मराठा राज्य' की स्थापना की। शिवाजी के प्रशासन की विशेषताएं  शिवाजी के प्रशासन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं। 1.केन्द्रीय शासन-शिवाजी के प्रशासन की पहली तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि शिवाजी ने एक निरंकुश राजतन्त्र की स्थापना की थी । लेकिन फिर उसके पश्चात् उनकी शासन-प्रणाली आधुनिक मन्त्रिमण्डल की भाँति थी। 2.प्रान्तीय शासन - शिवाजी के प्रशासन की दूसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि धीरे -धीरे शिवाजी का राज्य अधिक विस्तृत हो गया था ...

मौर्य साम्राज्य

 Q.मौर्य साम्राज्य की सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए। Answer:-चन्द्रगुप्त ने नन्दवंश के अन्तिम शासक को हराकर मौर्य वंश की स्थापना की थी। उसके पश्चात् सेल्यूलस ने भारत पर आक्रमण किया । जिसे फिर से चन्द्रगुप्त ने हरा दिया । चन्द्रगुप्त के बाद, उनका बेटा बिन्दुसार गद्दी पर बैठा। बिन्दुसार के बाद उसका बेटा अशोक सम्राट बना। चन्द्रगुप्त मौर्य ने जो साम्राज्य स्थापित किया था उसमें से कलिंग स्वतंत्र हो गया था अतः अब अशोक के समाने सबसे बड़ी चुनौती कलिंग को जीतना था। जिसके लिए उसने कलिंग का युद्ध लड़ा। जिसमें  वह बहुत बुरी तरह से हारा । उसके बाद उसने यह तय किया कि वह भविष्य में कोई युद्ध नहीं लड़ेगा। क्योंकि इस युद्ध में उसके लाखों लोग मारे गए थे और लाखों लोगों को बंदी बनाया गया था। इसके पश्चात अशोक ने अपने राज्य में जगह-जगह पर लम्बे लम्बे  खम्भे गड़वाए। और इन खम्भों पर वहाँ के अधिकारियों व लोगों के लिए अपने संदेश भी खुदवाए ताकि लोग उसकी बातों पर ध्यान दे सकें। खम्बों पर खुदे उसके संदेशों से हम अशोक के समय की कई बातें जान सकते हैं। उसने लिखवाया कि 'हर किस्म के लोगों ...

अकबर की धार्मिक नीति

 Q.अकबर की धार्मिक नीति की विवेचना कीजिए। Answer:- अकबर का पूरा नाम जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर था। उनके पिता का नाम हुमायूँ तथा माता का नाम हमीदा बानो था। पिता की मृत्यु के समय अकबर केवल तेरह वर्ष का था। हुमायूँ के विश्वास पात्र वैरम खाँ ने अकबर का राज्याभिषेक किया। उसके पश्चात्अ अपने संरक्षक बैरम खाँ की देख-रेख में राज-काज करने लगा।  अकबर का शारीरिक गठन -  अकबर की आकृति सुन्दर एवं व्यक्तित्व प्रभावशाली था। थे। जहाँगीर अनुसार- "उसके शरीर का आकार मध्यम श्रेणी का था, परन्तु कुछ लम्बा ही प्रतीत होता था। उसका रंग गेहुँआ था, उसकी आँखें और भौहें काली थी, उसका रंग रूप साफ होने की अपेक्षा कुछ साँवला था। उसका शरीर सिंह के समान था, छाती चौड़ी थी, उसके हाथ तथा भुजायें लम्बी थीं।"  बाबर (मुगल साम्राज्य का संस्थापक) ⬇ हुमायूँ अकबर ⬇ जहाँगीर (सलीम) ⬇ शाहजहाँ ⬇ औरंगज़ेब प्रसिद्ध विद्वानों के अनुसार- "उसके कन्धे चौड़े थे, उसकी टाँगें कुछ झुकी हुई थीं, जिससे घोड़े की सवारी में उसे विशेष सुविधा होती थी।  उसकी आँखें सागर के समान चमकती थीं, अपने पूर्वजों के समान वह अपने सिर के बाल उस...

प्राचीन भारत में न्याय और कानून की पुस्तक

 Q.प्राचीन भारत में न्याय और कानून की पुस्तकों पर एक लेख लिखिए। Answer:-प्राचीन भारत में न्याय और कानून की पुस्तकों पर लेख प्राचीन भारत में न्याय और कानून की व्यवस्था अत्यंत विकसित, सुव्यवस्थित और नैतिक मूल्यों पर आधारित थी।  उस समय समाज के संचालन, अपराधों के दंड, नागरिकों के कर्तव्यों और अधिकारों को निर्धारित करने के लिए अनेक धर्म, नीति और कानून संबंधी ग्रंथों की रचना की गई।  ये ग्रंथ न केवल कानूनी नियम बताते थे, बल्कि समाज में धर्म, नैतिकता और न्याय की भावना को भी मजबूत करते थे। प्राचीन भारतीय कानून की प्रमुख पुस्तकों में धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र का विशेष स्थान था।  धर्मसूत्रों में गौतम धर्मसूत्र और वशिष्ठ धर्मसूत्र प्रमुख माने जाते हैं।  इनमें सामाजिक आचरण, दंड व्यवस्था, ऋण, उत्तराधिकार और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े नियम दिए गए हैं। धर्मशास्त्रों में मनुस्मृति सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है।  मनुस्मृति को प्राचीन भारत की विधि संहिता कहा जाता है। इसमें वर्ण व्यवस्था, राजा के कर्तव्य, न्यायालयों की भूमिका, अपराध और उनके दंड, स्त्रियों की स्थिति तथा पारिवारिक कानू...

स्त्रियों की दशा

 Q.मध्यकालीन भारत में स्त्रियों की दशा पर टिप्पणी लिखिये। मध्यकालीन भारत में स्त्रियों की दशा मध्यकालीन भारत (लगभग 8वीं से 18वीं शताब्दी) में स्त्रियों की स्थिति समाज, धर्म, वर्ग और क्षेत्र के अनुसार भिन्न-भिन्न थी। सामान्यतः इस काल में स्त्रियों की सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है, फिर भी कुछ सकारात्मक पहलू भी दिखाई देते हैं। 1. सामाजिक स्थिति :- इस काल में बाल विवाह, पर्दा प्रथा (परदा/जेनाना), सती प्रथा और बहुविवाह जैसी कुप्रथाएँ प्रचलित थीं। विधवाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय थी और उन्हें पुनर्विवाह की अनुमति प्रायः नहीं थी। स्त्रियों को परिवार और समाज में पुरुषों पर आश्रित माना जाता था। 2. शैक्षिक स्थिति :- स्त्रियों की शिक्षा सीमित थी। उच्च वर्ग या राजपरिवार की कुछ स्त्रियाँ ही शिक्षा प्राप्त कर पाती थीं। सामान्य स्त्रियों को औपचारिक शिक्षा से वंचित रखा गया। धार्मिक ग्रंथों और साहित्य के अध्ययन का अधिकार भी बहुत कम था। 3. आर्थिक स्थिति:- स्त्रियाँ घरेलू कार्यों तक सीमित थीं। संपत्ति पर उनका अधिकार बहुत सीमित था। कुछ क्षेत्रों में स्त्रियाँ कृषि, हस...

अलाउद्दीन खिलजी

 Q.अलाउद्दीन खिलजी के आर्थिक सुधार Answer:-अलाउद्दीन खिलजी द्वारा किए गए प्रमुख आर्थिक सुधार निम्नलिखित हैं। 1.भूमि मापन एवं कर व्यवस्था :-अलाउद्दीन खिलजी ने भूमि का मापन करवाया और उपज का लगभग आधा भाग (1/2) राज्य कर के रूप में वसूला। 2.नकद कर की व्यवस्था :-अलाउद्दीन खिलजी ने कर को वस्तु में वसूल करने के बजाय नकद में वसूलने की व्यवस्था की, जिससे राजकोष में वृद्धि हुई । 3.जागीर प्रथा में सुधार :- अलाउद्दीन खिलजी ने जागीरदारों की आय पर नियंत्रण लगाया और उनकी मनमानी पर रोक लगाई। 4.बाजार नियंत्रण :-अलाउद्दीन खिलजी ने आवश्यक वस्तुओं जैसे अनाज, कपड़ा, घोड़े आदि के मूल्य निश्चित किए। 5.शाहना-ए-मंडी की नियुक्ति :- अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार व्यवस्था की निगरानी के लिए शाहना-ए-मंडी नामक अधिकारी नियुक्त किया। 6.भंडारण पर प्रतिबंध :-अलाउद्दीन खिलजी ने व्यापारियों द्वारा अनाज जमा करने (कालाबाजारी) पर कठोर प्रतिबंध लगाया। 7.घोड़ों के व्यापार पर नियंत्रण:- अलाउद्दीन खिलजी ने  सेना के लिए अच्छे घोड़े सस्ते दामों पर उपलब्ध हों, इसके लिए घोड़ा व्यापार नियंत्रित किया। 8.राज्य द्वारा अनाज का भंडारण ...

गुप्त प्रशासन

 Q.गुप्त प्रशासन की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। Answer:- गुप्त प्रशासन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं। 1.केंद्रीकृत राजतंत्र:- गुप्त काल की पहली तथा सबसे महत्वपूर्ण यह थी कि इस दौरान शासन व्यवस्था पूर्णतः सम्राट के हाथों में थी। राजा राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था और उसकी शक्ति वंशानुगत होती थी। 2.राजा का दैवी स्वरूप:- गुप्त काल की दूसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण यह थी कि इस दौरान गुप्त शासकों को विष्णु का प्रतिनिधि माना जाता था।  3.मंत्रिपरिषद की व्यवस्था:- गुप्त काल की तीसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण यह थी कि इस दौरान राजा को प्रशासन चलाने में मंत्रिपरिषद की सहायता प्राप्त होती थी। प्रमुख मंत्रियों में मंत्री, महादंडनायक आदि शामिल थे। 4.प्रांतीय प्रशासन:- गुप्त काल की चौथी तथा सबसे महत्वपूर्ण यह थी कि इस दौरान पूरे साम्राज्य को प्रांतों में विभाजित किया गया था।  5.स्थानीय स्वशासन:- गुप्त काल की पांचवी तथा सबसे महत्वपूर्ण यह थी कि इस दौरान नगरों और ग्रामों में स्थानीय संस्थाएँ कार्य करती थीं।  6.न्याय व्यवस्था:- गुप्त काल की छठी तथा सबसे महत्वपूर्ण यह थी कि इस दौर...

शेरशाह सूरी

 Q.शेरशाह सूरी के महान कार्य क्या थे?  Answer:- शेरशाह सूरी के महान कार्य निम्नलिखित थे। 1.प्रशासनिक सुधार – यह शेरशाह सूरी द्वारा किया गया पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य था क्योंकि शेरशाह सूरी ने अपने कार्यकाल में अनेकों प्रशासनिक सुधार किए। उसने राज्य को परगनों और ग्रामों में विभाजित किया तथा अधिकारियों के अधिकार स्पष्ट किए। 2.राजस्व सम्बन्धी सुधार – यह शेरशाह सूरी द्वारा किया गया दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य था क्योंकि शेरशाह सूरी ने अपने कार्यकाल में अनेकों राजस्व संबंधी सुधार किए उसने भूमि की नाप कराकर उपज के आधार पर कर निर्धारण की व्यवस्था की। 3.सड़क एवं परिवहन व्यवस्था –यह शेरशाह सूरी द्वारा किया गया तीसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य था क्योंकि शेरशाह सूरी ने ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माण कराया। तथा सड़कों के किनारे सरायें, कुएँ और वृक्ष लगवाए गए। 4.कानून व्यवस्था – यह शेरशाह सूरी द्वारा किया गया चौथा तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य था क्योंकि शेरशाह सूरी ने कठोर लेकिन न्यायपूर्ण कानून व्यवस्था स्थापित की, जिससे राज्य में शांति और सुरक्षा बनी रही। 5.डाक व्यवस्था का विकास –यह...

गुप्त वंश के पतन

 Q.गुप्त वंश के पतन के क्या कारण थे? Answer:-गुप्त वंश के पतन के कारण गुप्त वंश के पतन के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे। 1. उत्तराधिकार की कमजोरी एवं अयोग्य शासक:- यह गुप्त वंश के पतन का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण कारण था। क्योंकि गुप्त वंश के अंतिम शासक योग्य और शक्तिशाली नहीं थे।  2. हूण आक्रमण:-  यह गुप्त वंश के पतन का दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण कारण था। क्योंकि तोरमाण और मिहिरकुल जैसे हूण शासकों ने उत्तर भारत में भारी तबाही मचाई। स्कंदगुप्त ने कुछ समय तक इन्हें रोका, परंतु बाद में गुप्त साम्राज्य कमजोर हो गया। 3. आर्थिक स्थिति का कमजोर होना:-  यह गुप्त वंश के पतन का तीसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण कारण था। क्योंकि लगातार युद्धों, विशाल सेना के खर्च गुप्त वंश की आर्थिक स्थिती काफी कमज़ोर हो गई थी। 4. सामंतवादी व्यवस्था का विकास:-यह गुप्त वंश के पतन का चौथा तथा सबसे महत्वपूर्ण कारण था। क्योंकि  भूमि दान के कारण सामंत शक्तिशाली हो गए। धीरे-धीरे ये सामंत स्वतंत्र शासक बनने लगे और केंद्र की शक्ति को चुनौती देने लगे थे। 5. विशाल साम्राज्य का प्रशासन कठिन होना:-यह गुप...