सीमान्त लागत का अर्थ
Meaning of marginal cost

सीमान्त लागत को अंग्रेजी में marginal cost कहते हैं।
अर्थशास्त्र के अन्तर्गत एक अतिरिक्त इकाई का उत्पादन करने से कुल लागत में जितनी वृद्धि होती है उसे सीमान्त लागत कहते हैं।
For example:-
Marginal cost=difference in cost/ difference in output

लेखाकर्म के अन्तर्गत सीमान्त लागत से आशय परिवर्तनशील लागतों से है।

परिवर्तनशील लगता से आशय ऐसी लागतों से है जो कि परिवर्तनशील प्रकृति की होती हैं अर्थात उत्पादन की मात्रा के साथ-साथ प्रत्यक्ष रूप से परिवर्तित होती हैं।

सीमान्त लागत विधि का अर्थ
Meaning of marginal costing

सीमान्त लागत विधि को अंग्रेजी में marginal costing कहते हैं जिसे सीमान्त लागत लेखांकन, सीमान्त परिव्ययन ,सीमावर्ती लागत विधि तथा परिवर्तनीय परिव्ययन के नाम से भी जाना जाता है।

साधारण शब्दों में ," सीमान्त लागत विधि प्रबंध लेखांकन की एक ऐसी विधि है जो कि स्थिर तथा परिवर्तनशील व्ययों के वर्गीकरण पर आधारित है।

क्योंकि इसके अन्तर्गत स्कन्ध का मूल्यांकन करते समय स्थायी लागतों को छोड़ दिया जाता है तथा केवल और केवल परिवर्तनशील लागतों पर ही ध्यान दिया जाता है।

सीमान्त लागत विधि की विशेषताएं
characteristics of marginal costing

1.सीमान्त लागत विधि की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं।

2.सीमान्त लागत विधि लागतों के विश्लेषण और प्रस्तुतीकरण की एक तकनीक है।

3.सीमान्त लागत विधि के अन्तर्गत परिवर्तनशील लागतों को ही उत्पाद की लागत माना जाता है।

4.सीमान्त लागत विधि के अन्तर्गत स्थिर लागतों को लाभ- हानि खाते में अन्तरित(transfer )किया जाता है।

5.सीमान्त लागत विधि के अन्तर्गत विक्रय मूल्य में से सीमान्त लागत अर्थात् परिवर्तनशील लागत को घटाकर अंशदान ज्ञात करते हैं।
उसके बाद अंशदान में से स्थिर लागत को घटाकर शुद्ध लाभ ज्ञात करते हैं।

सीमान्त लागत विधि की मान्यताएं
assumptions of marginal costing

सीमान्त लागत विधि की प्रमुख मान्यताएं निम्नलिखित हैं ।अर्थात सीमान्त लागत विधि निम्नलिखित मान्यताओं पर आधारित है।

1.सीमान्त लागत विधि इस मान्यता पर आधारित है कि किसी भी वस्तु की लागत को स्थिर एवं परिवर्तनशील लागत में विभाजित किया जा सकता है।

2.सीमान्त लागत विधि इस मान्यता पर आधारित है कि प्रति इकाई परिवर्तनशील लागत अपरिवर्तनीय रहती है।

3.सीमान्त लागत विधि इस मान्यता पर आधारित है कि स्थिर लागतें स्थिर रहती हैं।

सीमान्त लागत विधि के लाभ
advantages of marginal costing

सीमान्त लागत विधि के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं।

1.सरलता(simplicity)- सीमान्त लागत विधि अत्यंत सरल है।

2.लागत नियन्त्रण में सहायक (helpful in cost control)- सीमान्त लागत विधि लागत नियन्त्रण में सहायक होती है क्योंकि यह लचीला बजट बनाने में सहायता पहुंचाती है।

3.मूल्य निर्धारण में सहायक (helpful in pricing)-  सीमान्त लागत विधि मूल्य निर्धारण में सहायक होती है।

Bcz,
minimum price= variable cost+ fixed cost.

4.निर्णय लेने में सहायक (helpful in decision making)-  सीमान्त लागत विधि निर्णय लेने में सहायक होती है।

For example:- एक उत्पाद या विभाग को बन्द करना, अनुकूलतम उत्पाद मिश्रण का निर्धारण, बनाओ या खरीदो निर्णय में

सीमान्त लागत विधि की सीमाएं
limitations of marginal costing

सीमान्त लागत विधि की प्रमुख सीमाएं निम्नलिखित हैं।

1.लागतों के वर्गीकरण में कठिनाई(difficulties in division of costs)-  सीमान्त लागत विधि के अन्तर्गत लागतों के वर्गीकरण में कठिनाई होती है।

2.लागत नियन्त्रण में असक्षमता (incapability in cost control)-  सीमान्त लागत विधि लागत नियन्त्रण में असक्षम होती है। इसकी तुलना में प्रमाप लागत विधि अथवा बजटरी नियंत्रण के द्वारा लागत पर अच्छी तरीके से नियन्त्रण स्थापित किया जा सकता है।

3.मूल्य निर्धारण का अनुपयुक्त आधार(inappropriate basis of pricing)- सीमान्त लागत विधि के अंतर्गत किसी भी वस्तु के मूल्य का निर्धारण अनुपयुक्त आधार पर किया जाता है। क्योंकि इसके अंतर्गत किसी भी वस्तु के मूल्य का निर्धारण करते समय स्थिर लागतों को सम्मिलित नहीं किया जाता है।

4.स्कन्ध का गलत मूल्यांकन(wrong valuation of stock)- सीमान्त लागत विधि के अंतर्गत स्कन्ध का गलत मूल्यांकन किया जाता है। क्योंकि इसके अंतर्गत स्कन्ध का मूल्य निर्धारण करते समय स्थिर लागतों को सम्मिलित नहीं किया जाता है।

सीमान्त लागत विधि एवं अवशोषण लागत विधि में अन्तर
difference between marginal costing and absorption costing

सीमान्त लागत विधि एवं अवशोषण लागत विधि में प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं

1.लागत (cost)- सीमान्त लागत विधि में केवल परिवर्तनशील लागतों को ही सम्मिलित किया जाता है ।

जबकि अवशोषण लागत विधि में परिवर्तनशील लागतों के साथ-साथ स्थिर लागतों को भी सम्मिलित किया जाता है।

2.निर्णय का आधार (basis of decision)- सीमान्त लागत विधि के अन्तर्गत निर्णय अंशदान के आधार पर लिया जाता है ।

जबकि अवशोषण लागत विधि के अन्तर्गत निर्णय लाभ के आधार पर लिया जाता है।

3.स्कन्ध का मूल्यांकन(valuation of stock)-  सीमान्त लागत विधि के अन्तर्गत स्कन्ध का मूल्यांकन परिवर्तनशील लागत के आधार पर किया जाता है।

जबकि अवशोषण लागत विधि के अन्तर्गत स्कन्ध का मूल्यांकन कुल कारखाना लागत के आधार पर किया जाता है।

4. उपरिव्ययों का अवशोषण (absorption of overheads)- सीमांत लागत विधि के अन्तर्गत उपरिव्ययों के अवशोषण की आवश्यकता ही नहीं पड़ती ।
जबकि अवशोषण लागत विधि के अन्तर्गत उपरिव्ययों का अवशोषण विवेकानुसार किया जाता है।

सीमान्त लागत विधि का प्रयोग/ उपयोग
uses/ applications of marginal costing

सीमान्त लागत विधि के प्रमुख प्रयोग निम्नलिखित हैं।

1.उत्पादन सम्बन्धी निर्णय में (in decision of production activities)-

सीमान्त लागत विधि के उत्पादन संबंधित निर्णय में प्रमुख प्रयोग निम्नलिखित हैं।

1.एक उत्पाद या विभाग को बन्द करना (closure of a department or a product line)

2.अनुकूलतम उत्पाद मिश्रण का निर्धारण करना(determination of optimum product mix)

2.बनाओ या खरीदो निर्णय में(in make or buy decision)-

सीमान्त लागत विधि के बनाओ या खरीदो निर्णय में प्रमुख प्रयोग निम्नलिखित हैं।

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