प्रमाप लागत
Q. प्रमाप लागत विधि से आप क्या समझते हैं ? इसके लाभ एवं हानियां बताइए प्रमाप लागत विधि को स्थापित करने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
Q.विभिन्न प्रकार के विचरणों की व्याख्या कीजिए। इन विचरणों की गणना किस प्रकार की जाती है?
प्रमाप लागत का अर्थ
Meaning of standard cost
प्रमाप लागत से आशय एसी लागत से है जिसे प्रमाप लागत विधि द्वारा निर्धारित किया जाता है।
प्रमाप लागत तथा अनुमानित लागत में अंतर
Difference between standard cost and estimated cost
Standard cost की गणना विभिन्न Standard के आधार पर की जाती है।
Estimated cost की गणना पिछले डाटा और अनुभवों के आधार पर की जाती है।
Standard cost flexible in nature नहीं होती है।
Estimated cost flexible in nature होती है।
प्रमाप लागत विधि का अर्थ
Meaning of standard costing
प्रमाप लागत विधि को अंग्रेजी में standard costing कहते हैं। जिसे प्रमाप परिव्ययन तथा
मानक परिव्ययांकन के नाम से भी जाना जाता है।
साधारण शब्दों में ," प्रमाप लागत विधि प्रबंध लेखांकन की एक ऐसी विधि है जिसके अंतर्गत प्रमाप लागत की वास्तविक लागत से तुलना करके अंतर के कारणों का पता लगाया जाता है ताकि संबंधित विभाग या व्यक्ति को लागत नियंत्रण के लिए उत्तरदाई ठहराया जा सके।
इस विधि का उपयोग प्रायः रासायनिक उद्योग, कागज उद्योग, वस्त्र उद्योग, ईंट उद्योग, खाद्य पदार्थ उद्योग, इंजीनियरिंग उद्योग, टेलीविजन उद्योग, मोटर कार उद्योग आदि में किया जाता है।
प्रमाप लागत विधि की स्थापना की कार्यविधी
Procedure of establishing a system of standard costing
1.प्रमाप लागत का निर्धारण करना
2.वास्तविक लागत का निर्धारण करना
3.प्रमाप लागत का वास्तविक लागत से तुलना
4.सुधारात्मक कार्यवाही
प्रमाप लागत विधि के लाभ
Advantages of standard costing
प्रमाप लागत विधि के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं।
1.अधिक व्यय पर नियंत्रण - प्रमाप लागत विधि के द्वारा अधिक व्यय पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।
2.कार्य क्षमता में वृद्धि - प्रमाप लागत विधि के द्वारा कार्य क्षमता में वृद्धि की जा सकती है।
3.लागत प्रतिवेदन में सहायक - प्रमाप लागत विधि लागत प्रतिवेदन में सहायक होती है।
4.बजट में सहायक- प्रमाप लागत विधि बजट बनाने में सहायक होती है।
प्रमाप लागत विधि की सीमाएं/ हानियां
Disadvantages of standard costing
प्रमाप लागत विधि की प्रमुख सीमाएं निम्नलिखित है
1.कुछ उद्योगों में उपयुक्त - प्रमाप लागत विधि केवल कुछ ही उद्योगों में उपयुक्त रहती है।
2.विशेषज्ञों की आवश्यकता - प्रमाप लागत विधि के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है।
3.प्रमापों का निर्धारण करना कठिन - प्रमाप लागत विधि में प्रमापों का निर्धारण करना काफी कठिन होता है।
4.बजट नियंत्रण की आवश्यकता - प्रमाप लागत विधि में बजट नियंत्रण की आवश्यकता होती है।
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विचरण का अर्थ
Meaning of variance
प्रमाप लागत एवं वास्तविक लागत के बीच के अन्तर को विचरण कहते हैं। जो कि अनुकूल अथवा प्रतिकूल किसी भी प्रकार का हो सकता है लेकिन कार्यशील समय हमेशा प्रतिकूल ही होता है जिसे किसी भी प्रकार से नियन्त्रित नहीं किया जा सकता है।
विचरण का वर्गीकरण
Classification of variances
विचरण को निम्नलिखित भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
1.क्रियात्मक आधार पर (on the functional basis )-
लागत विचरण - प्रामाप लागत तथा वास्तविक लागत के अन्तर को लागत विचरण कहते हैं।
विक्रय विचरण- प्रमाप बिक्री तथा वास्तविक बिक्री के अन्तर को विक्रय विचरण कहते हैं।
2.परिणाम के आधार पर (on the result basis) -
अनुकूल विचरण - यदि प्रमाप लागत वास्तविक लागत से अधिक होती है तो विचरण को अनुकूल कहा जाता है।
प्रतिकूल विचरण- यदि प्रमाप लागत वास्तविक लागत से कम होती है तो विचरण को प्रतिकूल कहा जाता है।
3.नियंत्रण के आधार पर (on the basis of control)-
नियन्त्रणीय विचरण - ऐसे विचरण जिन्हें नियंत्रित किया सकता है तथा जिसके लिए किसी व्यक्ति को उत्तरदाई ठहराया जा सकता है।नियन्त्रणीय विचरण कहलाते हैं।
अनियन्त्रणीय विचारण- ऐसे विचरण जिन्हें नियंत्रित नहीं किया सकता है तथा जिसके लिए किसी व्यक्ति को उत्तरदाई नहीं ठहराया जा सकता है। अनियन्त्रणीय विचरण कहलाते हैं।
विचरण की गणना
Calculation of variances
1.सामग्री विचरण (material variances) -
जब एक ही प्रकार की सामग्री का प्रयोग किया जाए
जब दो या दो से अधिक प्रकार की सामग्री का प्रयोग किया जाए
2.श्रम विचरण (labour variances )-
जब एक ही प्रकार के श्रम का प्रयोग किया जाए
जब दो या दो से अधिक प्रकार के श्रम का प्रयोग किया जाए
3.उपरिव्यय विचरण (overhead variance)-
4.विक्रय विचरण (sales variance)-
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