दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता 2016

 Q.दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता 2016 के नियामक ढांचे को स्पष्ट कीजिए।


Answer:-दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता 2016 के नियामक ढांचे के प्रमुख स्तंभ निम्नलिखित हैं।


1.भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड :-भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड को  अंग्रेजी में insolvency and bankruptcy board of India कहते हैं। जिसकी स्थापना 1 अक्टूबर 2016 को हुई थी और इसका मुख्य कार्यालय नई दिल्ली में स्थित है। 


संरचना 


IBBI में कुल 10 सदस्य होते हैं:

एक अध्यक्ष (Chairperson)

चार अंशकालिक सदस्य (Part-time members)

तीन पूर्णकालिक सदस्य (Whole-time members)

इनमें से दो सदस्य केंद्र सरकार(CG )द्वारा नामित किए जाते हैं।

एक सदस्य भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नामित किया जाता है।


नियुक्ति


भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI)के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।


योग्यता 

भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड के अध्यक्ष और अन्य सदस्य नियुक्त होने के लिए व्यक्ति के पास accounts ,finance, law तथा economics का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है।


वेतन

भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों का वेतन केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है।


कार्यकाल 


भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु दोनों में से जो भी कम हो तक होता है।


भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड की शक्तियां


भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड की शक्तियां


1.दिवाला पेशेवरों (Insolvency Professionals) को 

पंजीकृत करना।


2.दिवाला प्रक्रिया की समीक्षा और निगरानी करना।


3.दिशा-निर्देश, नियम और विनियम बनाना।


4.शिकायतों की जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई करना।


2. दीवाला पेशेवर:- दीवाला पेशेवर को अंग्रेजी में insolvency professional कहते हैं। दीवाला पेशेवर से आशा ऐसे व्यक्ति से है जो की दीवाला संबंधी प्रक्रिया को संचालित करता है।


3. न्यायिक प्राधिकरण:- न्यायिक प्राधिकरण को  अंग्रेजी में adjudicating authority कहते हैं।

यहां न्यायिक प्राधिकरण से आशय NCLT, NCLAT,DRT से है।


राष्ट्रीय कम्पनी विधि अधिकरण 

राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण को अंग्रेजी में National Company Law Tribunal कहते हैं। जिसे संक्षेप में NCLT नाम से भी जाना जाता है।  इसकी प्रधान पीठ दिल्ली में है तथा अन्य पीठ भारत में विभिन्न स्थानों पर हैं। 



NCLT की स्थापना 1 जून 2016 को कंपनी लॉ बोर्ड (Company Law Board) को समाप्त करके की गई थी अर्थात पहले जिन मामलों की सुनवाई कंपनी लॉ बोर्ड किया करता था, वर्तमान समय में उन सभी मामलों की सुनवाई राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण द्वारा की जाती है।


 NCLT का गठन एक अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों से मिलकर होता है। 

NCLT का अध्यक्ष केवल वही व्यक्ति हो सकता है जो कि उच्च न्यायालय का न्यायाधीश हो अथवा उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो अथवा दस वर्षों तक किसी न्यायालय का वकील रहा हो। 

NCLT का सदस्य केवल वही व्यक्ति हो सकता है जिसके पास लेखाशास्त्र, कानून और वित्त में कम से कम 15 वर्षों का विशेष ज्ञान और अनुभव हो। 


राष्ट्रीय कम्पनी विधि अपीलीय अधिकरण 

राष्ट्रीय कम्पनी विधि अपीलीय अधिकरण को अंग्रेजी में National Company Law Appellate Tribunal कहते है जिसे संक्षेप में NCLAT कहते है। NCLAT की स्थापना जून 2016 को की गई थी। 


NCLAT का गठन एक अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों से मिलकर होता है। 

NCLAT का अध्यक्ष केवल वही व्यक्ति हो सकता है जो कि उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश हो अथवा उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो। 


NCLAT का सदस्य केवल वही व्यक्ति हो सकता है जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश हो अथवा उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो अथवा अधिकरण (NCLT) में 5 वर्ष तक सदस्य रहा हो।


 

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