अवयस्क साझेदार
Q.क्या नाबालिग/अवयस्क को साझेदारी में शामिल किया जा सकता है एक फर्म में सम्मिलित अवयस्क के अधिकार एवं उत्तरदायित्वों का उल्लेख कीजिए।
Answer: अवयस्क साझेदार का अर्थ
अवयस्क साझेदार को अंग्रेजी में minor partner कहते हैं जिसे नाबालिग साझेदार के नाम से भी जाना जाता है। अवयस्क साझेदार से आशय ऐसे साझेदार से है जिसकी उम्र 18 वर्ष से कम है।
क्या अवयस्क साझेदार हो सकता है ?
भारत की साझेदारी अधिनियम 1932 के अनुसार एक अवयस्क साझेदार नहीं हो सकता लेकिन अन्य सभी साझेदारों की पूर्व सहमति से उसे फर्म के लाभों में सम्मिलित किया जा सकता है ।
क्योंकि भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872 के अनुसार अवयस्क के साथ किया गया अनुबंध व्यर्थ होता है ।क्योंकि कोई भी अवयस्क व्यक्ति अनुबंध करने की क्षमता नहीं रखता है।
अवयस्क साझेदार के अधिकार
भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 द्वारा अवयस्क साझेदार को निम्नलिखित अधिकार प्रदान किए गए हैं
1.फर्म के लाभ में हिस्सा पाने का अधिकार:-भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 द्वारा अवयस्क साझेदार को फर्म के लाभ में हिस्सा पाने का अधिकार प्रदान किया गया है।
2.फर्म की संपत्ति में हिस्सा पाने का अधिकार :-भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 द्वारा अवयस्क साझेदार को फर्म की संपत्ति में हिस्सा पाने का अधिकार प्रदान किया गया है।
3.फर्म की पुस्तकों का निरीक्षण करने का अधिकार :-भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 द्वारा अवयस्क साझेदार को फर्म की पुस्तकों का निरीक्षण करने का अधिकार प्रदान किया गया है।
4.फर्म के प्रबंध - संचालन में भाग न लेने का अधिकार:-भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 द्वारा अवयस्क साझेदार को फर्म के प्रबंध में भाग न लेने का अधिकार प्रदान किया गया है। अर्थात वह फर्म के प्रबंध-संचालन में भाग नहीं ले सकता है।
अवयस्क साझेदार के दायित्व
भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के अनुसार अवयस्क साझेदार के प्रमुख दायित्व निम्नलिखित हैं।
1. सीमित दायित्व:- भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के अनुसार अवयस्क साझेदार का दायित्व सीमित होता है अर्थात उसे फर्म के दायित्वों के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदाई नहीं ठहराया जा सकता है
2. सार्वजनिक सूचना देना:- भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के अनुसार अवयस्क को व्यस्क होने पर 6 माह के अंदर सार्वजनिक सूचना देना होता है कि वह फर्म में साझेदार बना रहना चाहता है अथवा नहीं।
यदि वह इस प्रकार की सूचना देने में असफल रहता है तो उस दशा में उसे अन्य साझेदारों की भांति फर्म का पूर्ण रूप से साझेदार मान लिया जाता है।
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