निगमीय प्रशासन
Q.निगमीय प्रशासन से क्या आशय है? निगमीय प्रशासन के विभिन्न सिद्धांतों का वर्णन कीजिए।
Answer:- निगमीय प्रशासन का अर्थ
निगमीय प्रशासन को अंग्रेजी में corporate governance कहते हैं।
साधारण शब्दों में," निगमीय प्रशासन से आशय ऐसी प्रणाली से है जिसके द्वारा किसी कंपनी का संचालन तथा नियंत्रण जाता है।
निगमीय प्रशासन का प्रमुख उद्देश्य कंपनी के हितधारकों(stakeholders) के हितों की रक्षा करना होता है।
For example:- शेयरधारक(shareholders), प्रबंधक(manager), कर्मचारी(employees), ग्राहक(customer) आदि।
निगमीय प्रशासन की विशेषताएं
निगमीय प्रशासन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं ।
1.पारदर्शिता (Transparency):-निगमीय प्रशासन की पहली तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि जिसके अन्तर्गत कंपनी के कार्यों में पारदर्शिता बनी रहती है। क्योंकि इसके अंतर्गत कंपनी के कार्यों तथा उसकी नीतियों की जानकारी कंपनी के हित धारकों को स्पष्ट रूप से दी जाती है।
For example :- समय पर annual report file करना
2.जवाबदेही (Accountability):-निगमीय प्रशासन की दूसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके अन्तर्गत संचालक मंडल तथा प्रबंधकों की जवाबदेही तय हो जाती है जिसके कारण उन्हें उनके द्वारा लिए गए निर्णय के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।
3.निष्पक्षता (Fairness):-निगमीय प्रशासन की तीसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके अन्तर्गत निष्पक्षता बनी रहती है। क्योंकि इसके अंतर्गत कंपनी के सभी हित धारकों के प्रति समान व्यवहार किया जाता है। चाहे वह छोटा हो या बड़ा।
4.हितधारकों का संरक्षण :-निगमीय प्रशासन की चौथी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसका प्रमुख उद्देश्य हितधारकों के हितों को संरक्षण प्रदान करना होता है।
निगमीय प्रशासन के सिद्धांत
निगमीय प्रशासन के प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं ।
1.एजेंसी सिद्धांत :- यह सिद्धांत इस मान्यता पर आधारित है कि किसी कंपनी के अंशधारी और प्रबंधकों के मध्य एजेंसी संबंध विद्यमान होता है।
इस संबंध में, अंशधारी प्रधान(Principal) होते हैं और प्रबंधक उनके एजेंट (Agent) के रूप में कार्य करते हैं।
2.प्रबंधक सिद्धांत :-यह सिद्धांत इस मान्यता पर आधारित है कि कंपनी के प्रबंधक केवल एजेंट नहीं होते बल्कि वह कंपनी के अच्छे प्रबंधक होते हैं।
3.हितधारकों का सिद्धांत:-यह सिद्धांत इस मान्यता पर आधारित है कि केवल अंशधारी ही नहीं बल्कि कंपनी के सभी हित धारकों के हितों को ध्यान में रखकर कम्पनी को चलाया जाना चाहिए।
एक अच्छे निगमीय प्रशासन की विशेषताएं
एक अच्छे निगमीय प्रशासन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं।
1.पारदर्शिता (Transparency):-एक अच्छे निगमीय प्रशासन में पारदर्शिता का होना अत्यन्त आवश्यक है। अर्थात् कंपनी के कार्यों तथा उसकी नीतियों की जानकारी कंपनी के हित धारकों को स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए।
2.जवाबदेही (Accountability):-एक अच्छे निगमीय प्रशासन में जवाबदेही का होना अत्यन्त आवश्यक है। अर्थात इसके अन्तर्गत संचालक मंडल तथा प्रबंधकों की जवाबदेही तय होनी चाहिए जिससे कि उन्हें उनके द्वारा लिए गए निर्णय के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।
3.निष्पक्षता (Fairness):-एक अच्छे निगमीय प्रशासन में निष्पक्षता का होना अत्यन्त आवश्यक है। इसके अंतर्गत कंपनी के सभी हित धारकों के प्रति समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
4.हितधारकों का संरक्षण :-एक अच्छे निगमीय प्रशासन में हितधारकों के संरक्षण का होना अत्यन्त आवश्यक है। अर्थात इसका प्रमुख उद्देश्य हितधारकों के हितों को संरक्षण प्रदान करना होना चाहिए।
एक अच्छे निगमिय प्रशासन के लाभ
एक अच्छे निगमिय प्रशासन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं।
1.कानूनी उलझनों से बचाव:-एक अच्छे निगमिय प्रशासन का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि
कानूनी उलझनों से बचाने में सहायक होता है।
2.जोखिम को कम करना (Reduction of Risk):-एक अच्छे निगमिय प्रशासन का दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह कंपनी के विभिन्न जोखिमों को कम करने में सहायक होता है।
For example:- financial risk, legal risk.
3.ब्रांड वैल्यू में वृद्धि:-एक अच्छे निगमिय प्रशासन का तीसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि ब्रांड वैल्यू में वृद्धि में सहायक होता है।
4.निवेशकों का विश्वास बढ़ाना (Enhancing Investor Confidence):-एक अच्छे निगमिय प्रशासन का चौथा तथा सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह निवेशकों का विश्वास बढ़ाने में सहायक होता है।
5.सभी हितधारकों के हितों की रक्षा:- एक अच्छे निगमिय प्रशासन का पांचवा तथा सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि सभी हितधारकों के हितों की रक्षा में सहायक होता है
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