अंशों का मूल्यांकन
Q.अंशों के मूल्यांकन से आप क्या समझते हैं अंशों के मूल्यांकन की विभिन्न पद्धतियां उदाहरण सहित समझाइए।
अंश का अर्थ:
अंश कंपनी की पूंजी की अविभाज्य इकाई है, जिसके और छोटे टुकड़े नहीं किए जा सकते हैं, तथा जिसका प्रयोग कंपनी पूंजी प्राप्त करने के लिए करती है।
प्रत्येक अंश का एक निश्चित मूल्य होता है, जिसे अंकित मूल्य अर्थात Face value कहते हैं।
अंशों के आन्तरिक मूल्य (intrinsic value)से आशय ऐसे मूल्य से है जो कि शुद्ध संपत्ति के मूल्य को अंशों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता है।
अंश निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं।
1.समता अंश
2.पूर्वाधिकारी अंश
सामान्यतः समता अंशों का ही मूल्यांकन किया जाता है।
अंशों के मूल्यांकन का अर्थ
अंशों की मूल्यांकन से आशय से अंशों के उस मूल्य को ज्ञात करने से है जिस पर कंपनी के अंशों का क्रय -विक्रय एवं हस्तांतरण किया जाता है
अंकित मूल्य की तुलना में अंशों का मूल्यांकन सामान्यतः अधिक होता है।
अंशों के मूल्यांकन की आवश्यकता
अंशों के मूल्यांकन की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से पड़ती है।
1.एकीकरण पर :-कम्पनी के एकीकरण पर अंशों के मूल्यांकन की आवश्यकता पड़ती है।
साधारण शब्दो में ,"जब दो या दो से अधिक कंपनी का समापन हो और एक नई कंपनी का निर्माण हो तो यह एकीकरण (Amalgamation) कहलाता है।"
2.संविलियन पर :-कम्पनी के संविलियन पर अंशों के मूल्यांकन की आवश्यकता पड़ती है।
जब एक या एक से अधिक कंपनियों का समापन हो, और एक नई कंपनी का निर्माण ना हो, तो यह संविलयन कहलाता है।
किसी भी कंपनी का संविलयन तभी होता है जब कोई मौजूदा कंपनी किसी अन्य मौजूदा कंपनी को खरीद लेती है।
3.पुनर्निर्माण पर :-कम्पनी के पुनर्निर्माण पर अंशों के मूल्यांकन की आवश्यकता पड़ती है।
4.ऋण प्राप्त करने पर:-यदि कोई कम्पनी किसी वित्तीय संस्था से अपने अंशों की जमानत पर ऋण प्राप्त करना चाहती है तो उसे दशा में उसे अपने अंशों के मूल्यांकन की आवश्यकता पड़ती है
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