साझेदारी फर्म का समापन
Q.साझेदारी फर्म के विघटन के कौन-कौन से तरीके हैं? विघटन के क्या परिणाम होते हैं?
Answer:- साझेदारी के विघटन/समापन/समाप्ति का अर्थ
साधारण शब्दों में" साझेदारी के समापन से आशय साझेदारी फर्म के समापन से लगाया जाता है जबकि ऐसा आवश्यक नहीं है कि यदि साझेदारी का विघटन हो रहा है तो उस दशा में साझेदारी फर्म का विघटन भी हो जाए।
क्योंकि साझेदारी का विघटन और साझेदारी फर्म का विघटन दोनों अलग-अलग है।
क्योंकि जब भी कोई नया साझेदार प्रवेश करता है अथवा जब भी कोई पुराना साझेदारी अवकाश ग्रहण करता है अथवा किसी साझेदार की मृत्यु हो जाती है तो उस दशा में पुरानी साझेदारी का विघटन हो जाता है और नई साझेदारी की स्थापना होती है।
साझेदारी फर्म के विघटन/समापन/समाप्ति का अर्थ
साझेदारी फर्म के समापन से आशय ऐसी वैधानिक कार्यवाही से है। जिसके द्वारा किसी भी फर्म के व्यवसाय को वन्द कर दिया जाता है। और उसकी सम्पत्तियों को बेचकर जो भी धन प्राप्त होता है। उससे सर्वप्रथम कम्पनी के लेनदारों/ऋण दाताओं का भुगतान किया जाता है। और इसके बाद भी यदि कुछ धन शेष बचता है, तो उसे साझेदारों में वांट दिया जाता है।
साझेदारी फर्म के समापन की दशाएं
साझेदारी के विघटन की प्रमुख दशाएं निम्नलिखित हैं।
1.जब साझेदार दिवालिया हो जाएं
2.जब साझेदार यह तय करें कि फर्म का विघटन कर दिया जाए
3.जब फर्म का कार्य गैर कानूनी हो जाए
4.यदि न्यायालय ऐसा आदेश दे
साझेदारी फर्म के विघटन की विधियां
1.अनिवार्य समापन :-यदि साझेदारी फर्म का समापन अनिवार्य रूप से किया जाता है तो इसे अनिवार्य समापन कहते हैं।
साझेदारी फर्म का समापन निम्नलिखित दशाओं में अनिवार्य रूप से हो जाता है।
1.किसी एक साझेदार को छोड़कर अन्य साझेदारी दिवालिया घोषित हो जाने पर
2.जब साझेदारी फर्म का चलाना वैधानिक हो जाए
3.सूचना द्वारा समापन :- यदि साझेदारी का समापन सूचना द्वारा किया जाता है तो इस सूचना द्वारा समापन कहते हैं।
For example:-ऐच्छिक साझेदारी का समापन
4.न्यायालय द्वारा समापन:- यदि साझेदारी के समापन का निर्णय न्यायालय द्वारा लिया जाता है तो इसे न्यायालय द्वारा समापन कहते हैं।
न्यायालय द्वारा समापन का आदेश निम्नलिखित दशाओं में दिया जा सकता है
1. किसी साझेदार के पागल हो जाने पर:- यदि फर्म का कोई साझेदार पागल हो जाता है तो उस दशा में न्यायालय फर्म के विघटन का आदेश दे सकता है।
2.किसी साझेदारी द्वारा हित हस्तांतरण किए जाने पर समापन:- यदि किसी साझेदार ने अपना हित किसी अन्य तीसरे व्यक्ति को हस्तान्तरित कर दिया है तो उस दशा में न्यायालय साझेदारी फर्म के विघटन का आदेश दे सकता है।
3.अन्य न्यायपूर्ण आधार पर:- न्यायालय अन्य न्यायपूर्ण आधार पर भी फर्म के विघटन का आदेश दे सकता है।
साझेदारी फर्म के समापन के बाद साझेदारों के अधिकार एवं कर्तव्य
साझेदारी फर्म के विघटन के बाद साझेदारों के प्रमुख अधिकार एवं कर्तव्य निम्नलिखित हैं।
1.सार्वजनिक सूचना देना :- साझेदारी फर्म के विघटन के बाद साझेदार का यह कर्तव्य है कि वह साझेदारी फर्म के समापन की सूचना दे।
2.फर्म की संपत्ति का प्रयोग :-साझेदारी फर्म के विघटन के बाद साझेदारी का यह अधिकार है कि वह फर्म की संपत्ति का प्रयोग फर्म के ऋणों का भुगतान करने के लिए करें ।
3.फर्म के ऋणों का भुगतान :-साझेदारी फर्म के विघटन के बाद प्रत्येक साझेदारी का यह कर्तव्य है कि वह फर्म के ऋणों का भुगतान करे।
4.फर्म से मिलता जुलता व्यवसाय करना:- साझेदारी फर्म के समापन के बाद प्रत्येक साझेदार का यह अधिकार है कि वह साझेदारी फर्म के नाम से मिलता-जुलता कोई भी व्यवसाय कर सकते हैं लेकिन ध्यान देने के बाद यह है कि वह इस दौरान फर्म के नाम का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
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