ख्याति का मूल्यांकन
Q.ख्याति की परिभाषा दीजिये। इसके मूल्यांकन की विभिन्न पद्धतियों का व्याख्या कीजिये ।
ख्याति का अर्थ
साधारण शब्दों में किसी भी व्यापारी की अतिरिक्त लाभ कमाने की क्षमता को ख्याति कहते हैं।
ख्याति एक अचल तथा अमूर्त संपत्ति है।
ख्याति की विशेषताएं
ख्याति की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं।
1.अमूर्त संपत्ति - ख्याति अमूर्त संपत्ति है ना कि मूर्त संपत्ति।
मूर्त संपत्ति से आशय से ऐसी संपत्ति से है जिसे देखा तथा छुआ जा सकता है।
For example:- land ,building, machinery furniture ,motorcycle
अमूर्त संपत्ति से आशय ऐसी संपत्ति से है जिसे देखा तथा छुआ नहीं जा सकता है।
For example:-Goodwill, copyright, patent, trademark etc.
2.उतार चढ़ाव:-ख्याति के मूल्य में निरंतर उतार चढ़ाव होता है अर्थात् इसका मूल्य स्थिर नहीं रहता है।
ख्याति के मूल्य को प्रभावित करने वाले तत्व /घटक
ख्याति के मूल्य को प्रभावित करने वाली प्रमुख घटक निम्नलिखित है।
1.व्यवसाय की प्रकृति :- व्यवसाय की प्रकृति ख्याति के मूल्य को प्रभावित करने पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण घटक है ।क्योंकि जिस व्यवसाय में जितनी अच्छी किस्म का माल तैयार किया जाता है उस व्यवसाय की ख्याति उतनी ही अधिक होगी। और जिस व्यवसाय में जितनी घटिया किस्म का माल तैयार किया जाता है उस व्यवसाय की ख्याति उतनी ही कम होगी।
2.व्यवसाय का स्थान :- व्यवसाय का स्थान ख्याति के मूल्य को प्रभावित करने वाला दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण घटक है। क्योंकि व्यवसाय का स्थान जितना अच्छा होगा उस व्यवसाय की ख्याति उतनी ही अधिक होगी।
और व्यवसाय का स्थान जितना खराब होगा उस व्यवसाय की ख्याति उतनी ही कम होगी।
3.व्यवसाय का प्रबंधन :-व्यवसाय का प्रबंधन ख्याति के मूल्य को प्रभावित करने वाला तीसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण घटक है क्योंकि किसी भी व्यवसाय का प्रबंधन जितना अधिक अच्छा होगा उस व्यवसाय की ख्याति उतनी ही अधिक होगी।
और व्यवसाय का प्रबंधन जितना खराब होगा उस व्यवसाय की ख्याति उतनी ही कम होगी।
4.लाभों की प्रवृत्ति :-लाभों की प्रवृत्ति(trend of profit)ख्याति के मूल्य को प्रभावित करने वाला चौथा तथा सबसे महत्वपूर्ण घटक है क्योंकि किसी भी व्यवसाय के लाभ जितने स्थाई (stable)प्रवृत्ति के होंगे तो उस दशा में उस व्यवसाय की ख्याति उतनी ही अधिक होगी।
और किसी भी व्यवसाय के लाभ जितने अस्थाई प्रवृत्ति के होंगे तो उस दशा में उस व्यवसाय की ख्याति उतनी ही कम होगी।
5.जोखिम की मात्रा :-जोखिम की मात्रा ख्याति के मूल्य को प्रभावित करने वाला पांचवा तथा सबसे महत्वपूर्ण घटक है क्योंकि किसी भी व्यवसाय में जोखिम की मात्रा जितनी कम होगी उस व्यवसाय में ख्याति उतनी ही अधिक होगी।
और किसी भी व्यवसाय में जोखिम की मात्रा जितनी अधिक होगी उस व्यवसाय की ख्याति उतनी ही कम होगी।
ख्याति के मूल्यांकन की आवश्यकता
ख्याति के मूल्यांकन की आवश्यकता निम्नलिखित दशाओं में होती है।
1.कम्पनी का क्रय करने पर
2.कम्पनी का विक्रय करने पर
3.कम्पनी के एकीकरण पर
4.कम्पनी के अंशों का मूल्यांकन करने पर(kyonki jab bhi hum kisi share ka fundamentals analysis karte hain to uss condition mein uski brand value bhi dekhte hain ki uski brand value kya hai)
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