प्रतिस्पर्धी विश्लेषण

 Q.प्रतिस्पर्धी विश्लेषण से आप क्या समझते हैं ? इसकी प्रक्रिया को समझाइए।


प्रतिस्पर्धी विश्लेषण का अर्थ 

प्रतिस्पर्धी से आशय ऐसे व्यापारी से है जो कि हमारे ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करता है।

प्रतिस्पर्धी विश्लेषण का अर्थ है अपने व्यापार के प्रतिस्पर्धीयों का गहराई से अध्ययन करना कि जो व्यापारी हमारे जैसे प्रोडक्ट या सेवाएं बेचते है वो क्या कर रहे हैं और हम उनसे बेहतर कैसे बन सकते हैं?


प्रतिस्पर्धी विश्लेषण की आवश्यकता 


प्रतिस्पर्धी विश्लेषण की प्रमुख आवश्यकता निम्नलिखित हैं।

अर्थात् प्रतिस्पर्धी विश्लेषण की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से पड़ती है।


1. प्रतियोगिता को समझने के लिए

2. ग्राहकों की जरूरतों को समझने के लिए

3. कमजोरियाँ पहचानने के लिए

4. बेहतर रणनीति (Strategy) बनाने के लिए

5. बाजार में टिके रहने के लिए


प्रतिस्पर्धी विश्लेषण की प्रक्रिया


प्रतिस्पर्धी विश्लेषण की प्रक्रिया को निम्नलिखित चरणों में विभक्त किया जा सकता है


1. प्रतियोगियों की पहचान (Identification of Competitors):- यह प्रतिस्पर्धी विश्लेषण की प्रक्रिया का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण चरण है जिसके अन्तर्गत व्यापारी द्वारा इस बात का पता लगाया जाता है कि हमारे उत्पाद या सेवा के बाजार में मुख्य प्रतियोगी कौन-कौन हैं। 

ये स्थानीय, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो सकते हैं।


2. जानकारी एकत्र करना (Data Collection):-यह प्रतिस्पर्धी विश्लेषण की प्रक्रिया का दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण चरण है जिसके अन्तर्गत व्यापारी  द्वारा प्रतियोगियों से संबंधित सभी जरूरी जानकारी एकत्र की जाती है।

For example:- उनके उत्पादों/सेवाओं की विशेषताएँ

मूल्य निर्धारण (प्राइसिंग)

विपणन रणनीतियाँ (मार्केटिंग)

ग्राहकों के फीडबैक(customer feedback)

बाजार में स्थिति(market position)


3. तुलना और विश्लेषण (Comparison and Analysis):-यह प्रतिस्पर्धी विश्लेषण की प्रक्रिया का तीसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण चरण है जिसके अन्तर्गत व्यापारी द्वारा अपनी कंपनी की ताकत और कमजोरियों की तुलना प्रतियोगियों से की जाती है।ताकि यह पता लगाया जा सके कि  कौन-सी चीज़ें हमें औरों से बेहतर बनाती हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है?


4. रणनीति निर्माण (Strategy Development):-यह प्रतिस्पर्धी विश्लेषण की प्रक्रिया का चौथा तथा सबसे महत्वपूर्ण चरण है जिसके अन्तर्गत व्यापारी द्वारा विश्लेषण के आधार पर एक ठोस योजना बनाई जाती है ताकि वह बाजार में अलग दिख सकें, ग्राहकों को बेहतर मूल्य दे सकें तथा प्रतियोगियों से आगे निकल सकें।


प्रतिस्पर्धियों के प्रकार (Types of Competitors)


प्रतिस्पर्धी निम्नलिखित प्रकार के होते हैं ।


1. मार्केट लीडर (Market Leader) :-मार्केट लीडर से आशय एसी कंपनियों से होता है जो कि बाजार में सबसे आगे होती हैं।तथा इनकी बिक्री सबसे ज़्यादा होती है क्योंकि लोग इनके ब्रांड को अच्छे से जानते हैं।

उदाहरण: कोल्ड ड्रिंक ।


2. बाजार में अनुयायी (Market Follower):-बाजार में अनुयायी कंपनियों से आशय ऐसी कंपनियों से होता है जो कि मार्केट लीडर को फॉलो करती हैं और लगभग वही प्रोडक्ट सस्ती कीमत पर बेचती हैं।


3. मार्केट चैलेंजर (Market Challenger):- ये वो कंपनियाँ हैं जो मार्केट लीडर को पीछे छोड़ने की कोशिश करती हैं।

और लगभग वही प्रोडक्ट सस्ती कीमत पर बेचती हैं।


उदाहरण: पेप्सी, कोका-कोला को टक्कर देने वाली मार्केट चैलेंजर है।


4. बाजार में निच सेगमेंट पर फोकस करने वाले (Market Nicher):- बाजार में निच सेगमेंट पर फोकस करने वाली कंपनियों से आशय ऐसी कंपनियों से है जो कि किसी खास छोटे बाजार (niche market) को टारगेट करती हैं।


For example:-बच्चों के लिए खास कपड़े बेचना 



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