सीमा शुल्क कानून (custom law)
Q.सीमा शुल्क' से आप क्या समझते हैं? वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद भारत में लगाए जाने वाले सीमा शुल्क के विभिन्न प्रकारों को संक्षेप में समझाइए।
Answer:- सीमा शुल्क का अर्थ
Meaning of custom duty
सीमा शुल्क को अंग्रेजी में custom duty कहते हैं।
सीमा शुल्क एक ऐसा अप्रत्यक्ष कर है। जो कि आयात अथवा निर्यात अथवा दोनों पर केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाता है।
यहां आयात से आशय किसी दूसरे देश से माल क्रय करने से है। तथा निर्यात से आशय किसी दूसरे देश को माल का विक्रय करने से है।
जब कोई देश किसी अन्य देश से माल क्रय करता है तो इसे आयात कहते हैं और इस पर सरकार द्वारा आयात शुल्क अर्थात import duty वसूली जाती है।
जब कोई देश किसी अन्य देश को माल का विक्रय करता है तो इसे निर्यात कहते हैं और इस पर सरकार द्वारा निर्यात शुल्क अर्थात export duty वसूली जाती है।
आयात शुल्क तथा निर्यात शुल्क को सम्मिलित रूप से सीमा शुल्क कहते हैं
सीमा शुल्क की विशेषताएं
Characteristics of custom duty
1.सीमा शुल्क एक अप्रत्यक्ष कर है
2.सीमा शुल्क केंद्र सरकार द्वारा वसूल किया जाता है।
3.आयात एवं निर्यात शुल्क को सम्मिलित रूप से सीमा शुल्क कहते हैं
सीमा शुल्क के लाभ/उद्देश्य
Advantages of custom duty
सीमा शुल्क के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं।
1.राजस्व प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान :-सीमा शुल्क का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह राजस्व प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान निभाता है क्योंकि सरकार को केंद्रीय उत्पाद शुल्क के बाद सबसे अधिक राजस्व यहीं से प्राप्त होता है।
2 .घरेलू उद्योगों को संरक्षण प्रदान करना :-सीमा शुल्क का दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह घरेलू उद्योगों को संरक्षण प्रदान करता है। क्योंकि जब सरकार को लगता है कि घरेलू उद्योगों को संरक्षण प्रदान करने की आवश्यकता है तो उसे दशा में वह आयात शुल्क की दर को बढ़ा देती है।
3.व्यापार घाटे को कम करना :-सीमा शुल्क का तीसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह व्यापार घाटे को कम करता है। क्योंकि जब सरकार को लगता है कि व्यापार घाटे को कम करने की आवश्यकता है तो उस दशा में वह आयात शुल्क को बढ़ा देती है जिससे आयात कम हो जाता है और जिसके फलस्वरुप व्यापार घाटा भी कम हो जाता है।
4.तस्करी पर नियंत्रण करना :-सीमा शुल्क का चौथा तथा सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इसके द्वारा तस्करी पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। क्योंकि जब सरकार को लगता है की तस्करी पर नियंत्रण स्थापित करने की आवश्यकता है तो उस दशा में वह आयत शुल्क को घटा देती है जिससे लोग सोने आदि महत्वपूर्ण चीजों की तस्करी नहीं करते हैं और सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होती है।
5.विदेशी मुद्रा की बचत करना:-सीमा शुल्क का पांचवा तथा सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इसके द्वारा विदेशी मुद्रा की बचत की जा सकती है क्योंकि जब सरकार को लगता है कि विदेशी मुद्रा की बचत करने की आवश्यकता है तो उस दशा में वह आयात शुल्क की दर को बढ़ा देती है जिससे आयात कम हो जाता है और विदेशी मुद्रा की भी बचत होती है जिसका प्रयोग रक्षा संबंधी सामान को क
क्रय करने के लिए किया जा सकता है।
सीमा शुल्क के दोष
Disadvantages of custom duty
सीमा शुल्क के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं।
1.महंगाई बढ़ाना :-सीमा शुल्क का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण दोष यह है कि इससे महंगाई बढ़ जाती है क्योंकि जब किसी देश की सरकार आयात कर की दर को बढ़ा देती है तो विदेश से आने वाली वस्तुएं महंगी हो जाती है और साथ ही घरेलू वस्तुएं भी तुलनात्मक रूप से महंगी हो जाते हैं।
2.काले धन में वृद्धि :-सीमा शुल्क का दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण दोष यह है कि इससे काले धन में वृद्धि होती है। क्योंकि जब किसी देश की सरकार आया शुल्क की दर को बढ़ा देती है तो उस दशा में उस देश में रहने वाले लोग माल की तस्करी करने लगते हैं और जब तस्करी करके किसी अन्य देश से माल अपने देश में लाया जाता है तो उसे माल से होने वाला लाभ काले धन के रूप में एकत्रित होता रहता है।
3.अच्छी वस्तुओं की कमी :-सीमा शुल्क का तीसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण दोष यह है कि इससे अच्छी वस्तुओं की कमी हो जाती है क्योंकि अक्सर विदेश में बनने वाली कुछ वस्तुएं हमारे देश की वस्तुओं से काफी अच्छी होती है।
सीमा शुल्क का वर्गीकरण
Classification of custom duty
सीमा शुल्क को निम्नलिखित भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
1. आधारभूत सीमा शुल्क(Basic Customs Duty - BCD):-आधारभूत सीमा शुल्क से आशय ऐसी सीमा शुल्क से है जो कि आयत की गई वस्तु पर सामान्य रूप से लगाया जाता है।
2. सुरक्षा शुल्क (Safeguard Duty):-सुरक्षा शुल्क से आशय ऐसे शुल्क से है जो विदेशी सामान पर तब लगाया जाता है जब किसी देश से किसी वस्तु का बहुत ज्यादा आयात होने लगे और उससे घरेलू उद्योग को खतरा हो।
3. प्रतिकारी शुल्क (Countervailing Duty - CVD):-प्रतिकारी शुल्क से आशा ऐसे शुल्क से है जो कि विदेशी सामान पर इसलिए लगाई जाती है ताकि वह घरेलू सामान के बराबर टैक्स में आ जाए। यानी, जो टैक्स भारत में बने सामान पर लगता है, वही विदेशी सामान पर भी लगे।
4. राशिपातन विरोधी शुल्क (Anti-Dumping Duty):-
राशिपातन विरोधी शुल्क से आशय ऐसे शुल्क से है जो विदेशी सामान पर तब लगाया जाता है जब कोई देश बहुत सस्ता माल भारत में बेच रहा है (कभी-कभी लागत से भी कम पर), और जिससे भारतीय कंपनियों को नुकसान हो रहा हो।
5. सामाजिक कल्याण सरचार्ज (Social Welfare Surcharge):-सामाजिक कल्याण सरचार्ज से आशय ऐसे शुल्क से है जो बेसिक कस्टम ड्यूटी के ऊपर लगाया जाता है और इसका उपयोग सामाजिक कल्याण के लिए किया जाता है।
Comments
Post a Comment