The Competition Act, 2002

प्रस्तावना 
Introduction 


प्रतिस्पर्धा अधिनियम का पूरा नाम प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 है जिसे MRTP अधिनियम 1969 के स्थान पर लाया गया है । जो कि कि 13 जनवरी 2003 से जम्मू कश्मीर को छोड़कर सम्पूर्ण भारत में लागू होता था लेकिन वर्तमान समय में संपूर्ण भारत में लागू होता है।इस अधिनियम का प्रमुख उदश्य बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। लेकिन इस अधिनियम के अन्तर्गत प्रतियोगिता विरोधी समझौते आदि पर रोक लगाई गई है।



परिभाषाएं 
Definitions

प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 में दी गई प्रमुख परिभाषाएं निम्नलिखित हैं।


कार्टेल:- कार्टेल को अंग्रेजी में cartel कहते हैं। 

कार्टेल से आशय व्यवसाय से संबंध रखने वाले ऐसे संघ से है जिसके अन्तर्गत निर्माता तथा वितरणकर्ता आदि को सम्मिलित किया जाता है


उपभोक्ता :- उपभोक्ता को अंग्रेजी में consumer  कहते हैं ‌।

उपभोक्ता से आशय ऐसे व्यक्ति से है जो कि किसी प्रतिफल के वदले किसी वस्तु को खरीदता है।


गुटबन्दी:- गुटबन्दी को अंग्रेजी में combination कहते हैं। जिसके अंतर्गत merger , acquisition and amalgamation को सम्मिलित किया जाता है। 

लेकिन गुटबंदी केवल उसी दशा में होगी जब एकीकृत होने वाले व्यवसाय की संपूर्ण संपत्ति की कीमत 1000 करोड रुपए से अधिक हो अथवा एकीकृत होने वाले व्यवसाय की कुल आवर्त 3000 करोड रुपए सेअधिक हो।




प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 की विशेषताएं 


प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2003 की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं।



1.वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय:- प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2003 की पहली तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह अधिनियम वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय(ministry of commerce and industry) के अन्तर्गत आता है।



2.भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की स्थापना:- प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2003 की दूसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इस अधिनियम के अन्तर्गत प्रतिस्पर्धा आयोग(Competition commission of India/CCI)की स्थापना स्थापना की गई है।


3.प्रतियोगिता विरोधी समझौते पर रोक - इस अधिनियम की तीसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके अन्तर्गत प्रतियोगिता-विरोधी समझौते(Anti competitive agreement)पर रोक लगाई गई है।

प्रतियोगिता विरोधी समझौते से आशय ऐसे समझौते से है जो कि दो या दो से अधिक व्यापारियों द्वारा प्रतियोगिता को कम करने के उद्देश्य से किए जाते हैं।

For example:- उपभोक्ताओं को  ऊंची कीमत वाली वस्तुओं की ओर ले जाना।


4.Mergers and Acquisitions का नियमन:इस अधिनियम की चौथी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके अन्तर्गत कंपनियों के विलय(merger )और अधिग्रहण (acquisition)पर निगरानी रखने की व्यवस्था की गई है ताकि प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।


भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग
Competition commission of India 


संरचना 

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का गठन 1 अध्यक्ष तथा 6 अन्य सदस्यों से मिलकर होता है।


नियुक्ति 

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग  के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति केन्द्र सरकार द्वारा की जाती है।


योग्यता 


भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग  के अध्यक्ष तथा सदस्यों को accounts, finance, law, economics तथा management आदि विषयों का ज्ञान होना अत्यन्त आवश्यक है।


वेतन


भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग  के सदस्यों के वेतन का निर्धारण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है जो कि


भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग  के अध्यक्ष के वेतन का निर्धारण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है जो कि भत्तों की राशि को छोड़कर 2,25,000 से 2,50,000 रूपये तक होता है।


कार्यकाल 


भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग  के अध्यक्ष तथा सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष तथा  65 वर्ष दोनों में जो कम हो तक होता है।


भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की शक्तियां 


प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 को निम्नलिखित शक्तियां प्रदान के गई हैं अर्थात् भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की शक्तियां निम्नलिखित हैं।


1.जांच करना:-प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 द्वारा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को गुटबन्दी(combination ) की जांच करने की शक्ति प्रदान की गई है। जिससे कि यह पता लगाया जा सके की गुटबन्दी प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं डालेगी।


2.आदेश जारी करना:-प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को आदेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई है। जिसके अंतर्गत वह व्यापारी को इस बात का आदेश दे सकता है कि वह इस प्रकार के समझौते/गुटबन्दी में दोबारा शामिल न हों।


3.दंड लगाना:-प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को दंड लगाने की शक्ति प्रदान की गई है । यदि प्रतिस्पर्धा आयोग को ऐसा लगता है कि व्यापारी पर जुर्माना लगाने की आवश्यकता है तो उस दशा में प्रतिस्पर्धा आयोग व्यापारी पर जुर्माना भी लगा सकता है।

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