राज्य
Q1.राज्य की उत्पत्ति के मुख्य सिद्धान्तों की व्याख्या कीजिए।
Answer :-प्रस्तावना / राज्य का अर्थ
विधि का राज्य से घनिष्ठ सम्बन्ध है। क्योंकि राज्य के बिना विधि का कोई अस्तित्व ही नहीं है।
साधारण शब्दों में ,"राज्य से आशय ऐसे राजनितिक संगठन से है। जो कि अपने नागरिकों की सुरक्षा तथा सामाजिक उन्नति के लिए अस्तित्व में आता है।
राज्य की परिभाषा
राज्य की परिभाषा के सम्बन्ध में विभिन्न विद्वानों में भिन्न भिन्न मतभेद रहे हैं। अर्थात राज्य के सम्बन्ध में विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गयी प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं।
1.अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति विलसन के अनुसार :- एक निश्चित भू भाग पर कानूनी रूप से संगठित किसी जन समुदाय को राज्य कहते हैं।
2.सामण्ड के अनुसार :- राज्य मनुष्यों का ऐसा संगठन है। जो निश्चित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बनाया जाता है।
राज्य की उत्पत्ति
राज्य की उत्पत्ति निश्चित रूप से किस प्रकार से हुई है। यह कहना काफी कठिन है। क्योंकि कुछ विद्वानों का मानना है। कि राज्य ईश्वर की देन है तथा कुछ विद्वानों का मानना है। कि राज्य की उत्पत्ति शक्ति के बल पर हुई है। जबकि कुछ अन्य विद्वानों का यह भी मानना है। कि राज्य की उत्पत्ति सामाजिक संविदा के आधार पर हुई है।"
राज्य की उत्पत्ति के सम्बन्ध में प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित है।
1. दैवीय उत्पत्ति का सिद्धान्त:- यह सिद्धान्त इस मान्यता पर आधारित है। कि राज्य की ईश्वर की देन है। और राजा ईश्वर का प्रतिनिधी होता है। अर्थात राजा की सत्ता को चुनौती देना ईश्वर की इच्छा के विरुद्ध माना जाता है।
For exp:- रामायण, महाभारत आदि ग्रन्थों में राजा को ईश्वर का प्रतिनिधी माना गया है।
2.बल का सिद्धान्त:- यह सिद्धान्त इस मान्यता पर आधारित है कि राज्य की उत्पत्ति बल के आधार पर हुई है। अर्थात शक्तिशाली लोगो ने कमजोर लोगो को अपने अधीन कर लिया और इसी प्रकार राज्य की स्थापना हुई।
3.सामाजिक संविदा का सिद्धान्त:- यह सिद्धान्त इस मान्यता पर आधारित है कि राज्य की उत्पत्ति सामाजिक संविदा अर्थात लोगो के आपसी समझौतो के आधार पर हुई है। क्योंकि लोगो ने अपने अधिकारो का कुछ हिस्सा एक शासक या संस्था को सौपा। ताकि वह लोगो की रक्षा सुरक्षा कर सके।
4.आनुवांशिक सिद्धान्त:- यह सिद्धान्त इस मान्यता पर आधारित है कि राज्य की उत्पत्ति पितृसत्तात्मक व्यवस्था से हुई है। अर्थात सबसे पहले परिवार बना उसके बाद समाज और आगे चलकर फिर इसी के आधार पर राज्य बना।
राज्य के आवश्यक तत्व
राज्य के लिए निम्नलिखित तत्वो का होना अत्यन्त आवश्यक है। अर्थात यदि निम्नलिखित तत्वो से एक भी तत्व की कमी हो तो ऐसे जनसमुदाय को राज्य नहीं कहेंगे।
1.जनसंख्या
2.भू भाग
3.सरकार
4.प्रभुता शक्ति
1.जनसंख्या :-राज्य के लिए जनसंख्या का होना अत्यन्त आवश्यक है। क्योकि जनसंख्या के आभाव में राज्य का अस्तित्व ही नहीं होता है।
प्लेटो के अनुसार ,"राज्य के लिए कम से कम पाँच हजार नागरिको का होना अत्यन्त आवश्यक है। जिसमें स्त्री, वृद्ध, बच्चे तथा दास को सम्मिलित नहीं किया जाता है।
रूसो के अनुसार राज्य के लिए कम से कम दस हजार नागरिको का होना अत्यन्त आवश्यक है।
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