महात्मा गांधी

 परिचय 


महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता, “बापू” और “महात्मा” के नाम से भी जाना जाता है।

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। इनके पिता का नाम करमचंद गांधी तथा माता का नाम पुतलीबाई गांधी था। इनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी था।इनके राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले जी थे।


शैक्षिक योग्यता

इन्होंने University College London से law की पढ़ाई की।


अनुभव

इन्होंने दक्षिण अफ्रीका में वकालत भी की और वहीं से सत्याग्रह की शुरुआत की इन्होंने भारत लौटकर स्वतंत्रता आंदोलन तथा अन्य कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व भी किया।

For example:-असहयोग आंदोलन

1920 – 1922

सविनय अवज्ञा आंदोलन

1930 – 1934

भारत छोड़ो आंदोलन

1942 – 1944 (लगभग)

Note:उपरोक्त तीनों आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण चरण थे। 


प्रमुख उपलब्धियाँ

इन्होंने भारत को आज़ादी दिलाने में मुख्य भूमिका अदा की। तथा अहिंसा (Non-violence) का रास्ता अपनाया।


सत्याग्रह आंदोलन 


1919 में ब्रिटिश सरकार ने रौलेट एक्ट पास कर दिया जिसके अंतर्गत सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमे के कैद कर सकती थी। गांधी जी ने फरवरी 1919 ई. में इसके विरोध में सत्याग्रह आंदोलन प्रारम्भ कर दिया।

गांधी जी ने सत्याग्रह करने के लिए ये कार्यक्रम बनाए-


1.अन्याय करने वाले का असहयोग करना अर्थात् सहयोग न करना ।

2.अनुचित लग रही बातों की अवज्ञा करना अर्थात् उन्हें मानने से इनकार कर देना।


असहयोग आंदोलन


अन्याय करने वाले का असहयोग करने अर्थात् सहयोग न करने के लिए गांधी जी ने असहयोग आंदोलन चलाया जिसकी प्रमुख गतिविधियां निम्नलिखित थीं।



1.अंग्रेजों को भारत में सरकार चलानी है तो खुद चलाएँ। हम क्यों उनका शासन संभालें ?" यह कहते हुए कई लोगों ने सरकारी पदों से इस्तीफा दे दिया।


2 .अनेक छात्रों ने सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़ दिए और स्वदेशी स्कूलों में भर्ती होने लगे।


3. अंग्रेजी कपड़े व शराब की दुकानों पर धरने दिए गए। तथा स्वदेशी चीजों को बढ़ावा देने की कोशिश की गई।


4.देश भर में कई वकीलों ने कचहरी में वकालत छोड़ दी।


5.कई जगह परिषद् के चुनावों में लोगों ने वोट नहीं डाले।


6.गांधी जी ने लोगों द्वारा चरखा चलाने व सूत कातने का अभियान जोड़ दिया। इससे घर-घर में देश को आत्म निर्भर बनाने की भावना मजबूत बनी


सविनय अवज्ञा आंदोलन


अनुचित लग रही बातों की अवज्ञा करना अर्थात् उन्हें मानने से इनकार कर देने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया जिसकी प्रमुख गतिविधियां निम्नलिखित थीं।



1930 ई0 में नमक कानून को तोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन का शुरू किया। 12 मार्च, 1930 ई० को गांधी जी ने साबरमती आश्रम से अपने 78 सहयोगियों के साथ डांडी यात्रा प्रारम्भ की तथा 6 अप्रैल 1930 ई० में डाँडी पहुँचकर गांधी जी ने समुद्र के किनारे नमक बनाकर अंग्रेजों का कानून तोड़ दिया।



इस सविनय अवज्ञा आंदोलन में शीघ्र ही बहुत बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष स्वयं सेवकों ने भाग लिया। 


विदेशी माल का बहिष्कार किया गया।


 कहीं-कहीं किसानों ने लगान देना बन्द कर दिया। 


सरकार ने निर्मम दमन, निहत्थे स्त्री-पुरुषों पर लाठी और गोली की बौछार के द्वारा इस आंदोलन को दबाने का प्रयास किया।


 5 मई, 1930 ई0 को सरकार ने गांधी जी को गिरफ्तार कर लिया। इसके विरोध में मद्रास (चेन्नई), कलकत्ता (कोलकाता) और कराची आदि नगरों में प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों की विशाल भीड़ और पुलिस के बीच टकराव हुए।



भारत छोड़ो आंदोलन


भारत छोड़ो आन्दोलन' गांधी जी द्वारा आयोजित अन्तिम आन्दोलन था। इस आन्दोलन की विशेषता यह थी कि यह एक अहिंसात्मक आन्दोलन नहीं था, बल्कि भारतीय जनता के ब्रिटिश शासन के विरुद्ध चरम आक्रोश का प्रतीक था। अंत में यही आन्दोलन भारत में ब्रिटिश राज्य के सूर्यास्त का कारण बना था।

इसी दौरान गांधी जी ने करो या मरो का नारा दिया था।

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