संगठित अपराध

 संगठित अपराध का अर्थ 


संगठित अपराध से आशय ऐसे अपराध से है जो कि दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा नियोजित ढंग से संगठित होकर किया जाता है। 


ध्यान देने योग्य बात यह है कि संगठित अपराध की प्रक्रिया प्रायः गोपनीय रहती है। 

इसके अन्तर्गत चोरी, जुआ, तस्करी, वेश्यावृत्ति, जालसाजी, डकैती आदि को सम्मिलित किया जाता है। 


संगठित अपराध के लक्षण 


संगठित अपराध के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं: 


1. दो या दो से अधिक व्यक्ति: संगठित अपराध के लिए कम से कम दो व्यक्तियों का होना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि अकेला कोई भी एक व्यक्ति संगठित अपराध नहीं कर सकता है। 


2.नियोजित ढंग:- संगठित अपराध के लिए नियोजित ढंग का होना अत्यंत आवश्यक है। 


3.संगठन / कार्य विभाजन:- संगठित अपराध के लिए संगठन / कार्य विभाजन का होना अत्यंत आवश्यक है। 


4.गोपनीयता:- संगठित अपराध के लिए गोपनीयता का होना अत्यंत आवश्यक है। 


Note:- ध्यान देने योग्य बात यह है कि Indian Penal Code, 1860 (IPC) में “organised crime” और “petty organised crime” को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया था

 जबकि भारतीय न्याय संहिता 2023 में “organised crime” और “petty organised crime” को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। और साथ ही इन दोनों अपराधों के लिए दण्ड का प्रावधान भी किया गया है।

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