विज्ञापन

 Q.विज्ञापन संहिता से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।


Answer:-विज्ञापन का अर्थ

विज्ञापन को अंग्रेजी में Advertising कहते हैं जिसका अर्थ है 'सार्वजनिक सूचना देना'।


साधारण शब्दों में ,"पहले विज्ञापन से आशय केवल सूचना देने से लगाया जाता था, लेकिन वर्तमान प्रतियोगिता के युग में विज्ञापन के अन्तर्गत उन सभी क्रियाओं को सम्मिलित किया जाता है जिनके द्वारा वस्तु की उपयोगिता का ज्ञान जनता को कराया जा सकता है।


विज्ञापन के उद्देश्य


विज्ञापन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं।


1.विक्रय में वृद्धि करना:-विज्ञापन का पहला तथा सबसे  महत्वपूर्ण उद्देश्य विक्रय में वृद्धि करना है। क्योंकि जैसे जैसे कोई संस्था अच्छे और अधिक विज्ञापन चलाती है वैसे वैसे उसके विक्रय में वृद्धि होती है।


2.लाभ में वृद्धि करना:-विज्ञापन का दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य लाभ में वृद्धि करना है।क्योंकि जैसे जैसे कोई संस्था अच्छे और अधिक विज्ञापन चलाती है वैसे वैसे उसके लाभों में वृद्धि होती है।


3.विक्रेताओं की सहायता करना:-विज्ञापन का तीसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य विक्रेताओं की सहायता करना है।


विज्ञापन के प्रकार 


विज्ञापन निम्नलिखित प्रकार के होते हैं।


1.वाणिज्यिक विज्ञापन (Commercial advertising):-वाणिज्यिक विज्ञापन से आशय ऐसे विज्ञापन से है जिसका प्रमुख उद्देश्य वस्तु अथवा सेवा का सही चित्र प्रस्तुत करके बिक्री बढ़ाना होता है।


2.आभासी विज्ञापन(Dummy advertisement):-से आशय ऐसे विज्ञापन से है वस्तुओं जिसका प्रमुख उद्देश्य वस्तु अथवा सेवा का सही चित्र प्रस्तुत करना नहीं बल्कि जनता को भ्रमित करना होता है।



विज्ञापन के साधन 


विज्ञापन के  प्रमुख साधन निम्नलिखित हैं।


1. समाचार पत्र या प्रेस:- यह विज्ञापन का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण साधन है।जिसके अन्तर्गत वस्तु से संबंधित विवरण समाचार पत्र  में प्रकाशित कराया जाता है।


2. पोस्टर्स :-यह विज्ञापन का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण साधन है।जिसके अन्तर्गत वस्तु से संबंधित विवरण पोस्टर्स आदि के माध्यम से जगह जगह लगवा दिया जाता है।


3.दुकान की खिड़की पर प्रदर्शन :-यह विज्ञापन का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण साधन है।जिसके अन्तर्गत वस्तु को दुकान की खिड़की पर रख दिया जाता है तथा इस पर कुछ चिट भी लगा दी जाती हैं।


विज्ञापन संहिता 
advertisement code


विज्ञापन से आशय नियमों के ऐसे समूह से है जिनका पालन विज्ञापन तैयार करते एवं प्रसारित करते समय किया जाता है, ताकि जनता को सही, सत्य एवं नैतिक जानकारी प्राप्त हो सके।


कंपनियों द्वारा अपराध 

यदि कंपनियों द्वारा विज्ञापन संहिता का पालन नहीं किया जाता हैं और कोई अपराध किया जाता है तो उस दशा में गलत विज्ञापन के लिये कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 अथवा औषधि और चमत्कारिक उपचार अधिनियम, 1954 आदि कानूनों के अन्तर्गत मुकदमा दायर किया जा सकता है ।



सरकार द्वारा उठाए गए कदम

अनैतिक, असत्य एवं भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए भारत सरकार (विधायी शक्ति) द्वारा निम्नलिखित कानून पारित किए गए हैं।


1.उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019:-अनैतिक, असत्य एवं भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए भारत सरकार (विधायी शक्ति) द्वारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 पारित किया गया है।जिसका प्रमुख उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों को संरक्षण प्रदान करना है।

जिसके अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति झूठा विज्ञापन चलाता है तो उस दशा में उसके खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की जा सकती है।


2.औषधि और चमत्कारिक उपचार अधिनियम, 1954:-अनैतिक, असत्य एवं भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए भारत सरकार (विधायी शक्ति) द्वारा औषधि और चमत्कारिक उपचार अधिनियम, 1954 पारित किया गया है।


हमदर्द दवाखाना बनाम भारत संघ


यह मामला वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित है।इस मामले में न्यायालय द्वारा यह निर्णय दिया गया है कि विज्ञापन (Advertisement) एक वाणिज्यिक वाक् (Commercial Speech) है।


लेकिन निम्नलिखित आधार पर नागरिकों की वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।


राज्य की सुरक्षा

विदेशी राज्यों से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध

लोक व्यवस्था

शिष्टाचार या सदाचार के हित में

न्यायालय अवमान (Contempt of Court)

मानहानि (Defamation)अपराध करने के लिए 

भारत की संप्रभुता और अखंडता

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