प्रबन्ध लेखांकन - एक परिचय (Management accounting : An introduction)

 

प्रबन्ध लेखांकन की उत्पत्ति
Origin of management accounting

प्रबन्ध लेखांकन की अवधारणा जेम्स एच ब्लिस के द्वारा दी गई थी।
जिसका प्रयोग सर्वप्रथम 1950 में किया गया था तथा देखते ही देखते 1950 के बाद यह शब्द अमेरिका तथा अन्य देशों में भी काफी प्रचलित हो गया ।

प्रबन्ध लेखांकन  का अर्थ
Meaning of Management accounting

प्रबन्ध लेखांकन को प्रबन्धकीय लेखा विधि के नाम से भी जाना जाता है।
प्रबन्ध लेखांकन को अंग्रेजी में Management accounting  कहते हैं जो कि दो शब्दों से मिलकर बना है Management + accounting

Management का अर्थ है प्रबन्ध तथा accounting का अर्थ है लेखांकन

प्रत्येक व्यावसायिक उपक्रम एक समूहवद्ध संस्था होती है जो कि स्वयं कार्य नहीं कर सकती  है। अर्थात् उसे चलाने के लिए एक प्रेरक शक्ति की आवश्यकता होती है जिसे प्रबंध कहते हैं।

तथा लेखांकन से आशय लेन - देनों को क्रमबद्ध रूप में लिखने, वर्गीकरण करने, सारांश तैयार करने एवं उनको प्रस्तुत करने से है। जिससे कि उनका विश्लेषण एवं निर्वचन किया जा सके।

साधारण शब्दों में," प्रबन्ध लेखांकन लेखांकन की एक ऐसी शाखा है। जो कि केवल लेन-देनों के विश्लेषण एवं निर्वाचन करने से संबंधित ही नहीं है। बल्कि प्रबंध को विभिन्न प्रबंधकीय कार्यों में सहायता प्रदान करती है।
For: example:- नियोजन , संगठन , समन्वय, अभिप्रेरण , नियंत्रण, निर्देशन, निर्णयन आदि।

प्रबन्ध लेखांकन की परिभाषाएं
definition of management accounting

ऐन्थोनी के अनुसार," प्रबन्ध लेखांकन का संबंध उन लेखांकन सूचनाओं से है जो कि प्रबंधन के लिए उपयोगी होती हैं।"

प्रबन्ध लेखांकन की विशेषताएं
characteristics of management accounting

प्रबन्ध लेखांकन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं।

1.चयनात्मक प्रकृति (selective nature)-प्रबन्ध लेखांकन चयनात्मक प्रकृति का होता है क्योंकि इसके अंतर्गत केवल उन्हीं सूचनाओं का विश्लेषण किया जाता है जो कि प्रबन्ध के लिए उपयोगी होती हैं।

2. विभिन्न पद्धतियों का प्रयोग(use of different techniques)- प्रबन्ध लेखांकन में विभिन्न पद्धतियों का प्रयोग किया जाता है।
For example:- financial analysis, decision accounting, budgetary control, standard costing, marginal costing  etc.

3.निश्चित नियमों पर आधारित नहीं (not based on the fixed norms)- प्रबन्ध लेखांकन वित्तीय लेखांकन की तरह निश्चित नियमों पर आधारित नहीं होता है।

4. समंक प्रदान करना ना कि निर्णय(provide data not the decision)- प्रबन्ध लेखांकन समंक प्रदान करता है ना कि निर्णय जिसके आधार पर निर्णय लेना प्रबंध का कार्य होता है।

प्रबन्ध लेखांकन का क्षेत्र
scope of Management accounting

प्रबन्ध लेखांकन का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है जिसके अंतर्गत निम्नलिखित को सम्मिलित किया जाता है।

1.वित्तीय लेखांकन (financial accounting)- वित्तीय लेखांकन से आशय लेन - देनों को क्रमबद्ध रूप में लिखने, वर्गीकरण करने, सारांश तैयार करने एवं उनको प्रस्तुत करने से है। जिससे कि उनका विश्लेषण एवं निर्वचन किया जा सके।

2.लागत लेखांकन (cost accounting)- लागत लेखांकन लेखांकन की एक ऐसी शाखा है। जिसके अंतर्गत किसी वस्तु के उत्पादन से संबंधित विभिन्न व्ययों का लेखा इस प्रकार से किया जाता है। ताकि उत्पादित की जाने वाली वस्तु की कुल लागत ज्ञात करने के साथ-साथ प्रति इकाई लागत भी ज्ञात की जा सके।

3.कर लेखांकन (tax accounting)- कर लेखांकन लेखांकन की एक ऐसी शाखा है जिसके अंतर्गत किसी संस्था के कर दायित्वों का निर्धारण किया जाता है।

4. बजटिंग (Budgeting )- बजटिंग से आशय एसी प्रक्रिया है जिसमें निम्नलिखित को सम्मिलित किया जाता है।
बजट
बजटरी नियंत्रण।

प्रबन्ध लेखांकन के कार्य/ महत्व /उपयोगिता /उद्देश्य
functions/ importance of Management accounting

प्रबंध लेखांकन के प्रमुख कार्य निम्नलिखित है।

1.नियोजन में सहायता करना(to help in the planning)- प्रबन्ध लेखांकन नियोजन में सहायता करता है।

2.संगठन में सहायता करना(to help in the organisation )- प्रबन्ध लेखांकन संगठन में सहायता करता है।

3.समन्वय में सहायता करना(to help in the coordinating )- प्रबन्ध लेखांकन समन्वय में सहायता करता है।

4.अभिप्रेरण में सहायता करना(to help in the motivating )- प्रबन्ध लेखांकन अभिप्रेरण में सहायता करता है।

5.नियंत्रण में सहायता करना(to help in the control )- प्रबन्ध लेखांकन नियंत्रण में सहायता करता है।

6.निर्देशन में सहायता करना(to help in the directing)- प्रबन्ध लेखांकन निर्देशन में सहायता करता है।

7.निर्णयन में सहायता करना(to help in the decision making)-प्रबन्ध लेखांकन निर्णयन में सहायता करता है।

प्रबन्ध लेखांकन के उपकरण एवं तकनीक
tools and techniques of Management accounting

प्रबन्ध लेखांकन की प्रमुख तकनीकें निम्नलिखित है

1.वित्तीय विश्लेषण(financial analysis)- यह प्रबंध लेखांकन की पहली तथा सबसे महत्वपूर्ण तकनीक है जिसके अंतर्गत अनुपात विश्लेषण,कोष प्रवाह विवरण तथा रोकड़ प्रवाह विवरण आदि को सम्मिलित किया जाता है।

2.निर्णयन लेखांकन(decision accounting)- यह प्रबंध लेखांकन की दूसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण तकनीक है जिसके अंतर्गत सम विच्छेद विश्लेषण को सम्मिलित किया जाता है।

3.बजटरी नियंत्रण(budgetary control)- यह प्रबंध लेखांकन की तीसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण तकनीक है जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के बजटों को तैयार किया जाता है।

4.प्रमाप लागत विधि (standard costing)- यह प्रबंध लेखांकन की चौथी तथा सबसे महत्वपूर्ण तकनीक है जिसके अंतर्गत लागतों को अग्रिम में ही निर्धारित कर लिया जाता है एवं उसके पश्चात उसकी तुलना वास्तविक लागतों से करके विचरणों का पता लगाया जाता है ताकि संबंधित विभाग को लागत नियंत्रण के लिए उत्तरदाई ठहराया जा सके।

5.सीमान्त लागत विधि(marginal costing)- यह प्रबंध लेखांकन की पांचवी तथा सबसे महत्वपूर्ण तकनीक है जिसके अंतर्गत लागत का निर्धारण करने के लिए केवल परिवर्तनशील व्ययों को ही सम्मिलित किया जाता है।

प्रबन्ध लेखांकन और वित्तीय लेखांकन में अन्तर
difference between Management accounting and financial accounting

प्रबंध लेखांकन तथा वित्तीय लेखांकन में प्रमुख अंतर निम्नलिखित है।

प्रबंध लेखांकन का प्रयोग करना ऐच्छिक है ।
वित्तीय लेखांकन का प्रयोग करना ऐच्छिक नहीं है।

प्रबंध लेखांकन में तैयार की गई सूचनाओं का प्रकाशन नहीं किया जाता है।
वित्तीय लेखांकन में तैयार की गई सूचनाओं का प्रकाशन किया जाता है।

प्रबंध लेखांकन में तैयार किए गए लेखों का अंकेक्षण नहीं कराया जा सकता है ।
वित्तीय लेखांकन में तैयार किए गए लेखों का अंकेक्षण कराया जा सकता है।

प्रबंध लेखांकन में लेखे एक निश्चित समय अवधि के लिए तैयार नहीं किए जाते हैं
वित्तीय लेखांकन में लेखे एक निश्चित समय अवधि के लिए तैयार किए जाते हैं।

प्रबंध लेखांकन का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है ।
वित्तीय लेखांकन का क्षेत्र अत्यंत संकुचित है

प्रबंध लेखांकन में लेखांकन के लिए निश्चित नियमों का पालन नहीं किया जाता है ।
वित्तीय लेखांकन में लेखांकन के लिए निश्चित नियमों का पालन किया जाता है।

प्रबन्ध लेखांकन की सीमाएं
limitations of Management accounting

प्रबंध लेखांकन की प्रमुख सीमाएं निम्नलिखित हैं।

1.वित्तीय एवं लागत लेखों पर आधारित (based on the financial and cost accounts)- प्रबंध लेखांकन वित्तीय एवं लागत लिखो पर आधारित होता है।

2.अधिक ज्ञान की आवश्यकता (required more knowledge)- प्रबंध लेखांकन के लिए अधिक ज्ञान की आवश्यकता होती है।

3.खर्चीली पद्धति (expensive system)- प्रबंध लेखांकन एक खर्चीली पढ़ती है जिसका प्रयोग प्रायः बड़े-बड़े व्यवसाय में ही किया जाता है।

4.विकासवादी अवस्था (evolutionary stage)- प्रबंध लेखांकन एक विकासवादी अवस्था में है जिसमें नई-नई तकनीक का विकास होता रहता है।

5.विस्तृत क्षेत्र(wide scope)- प्रबंध लेखांकन का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है जिसके कारण इसके प्रयोग में अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

प्रबन्ध लेखांकन प्रणाली की स्थापना
installation of Management accounting system

प्रबंध लेखांकन प्रणाली की स्थापना करने की प्रक्रिया को निम्नलिखित चरणों में विभक्त किया जा सकता है।

1.नियमावली (manual)- यह प्रबंध लेखांकन प्रणाली की स्थापना करने की प्रक्रिया का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण चरण है जिसके अंतर्गत एक नियमावली तैयार की जाती है।

2.फॉर्म की तैयारी (preparing of forms)- यह प्रबंध लेखांकन प्रणाली की स्थापना करने की प्रक्रिया का दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण चरण है जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के फार्मो को तैयार किया जाता है।

3.कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण(proper training to the staff)- यह प्रबंध लेखांकन प्रणाली की स्थापना करने की प्रक्रिया का तीसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण चरण है जिसके अंतर्गत कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिया जाता है।

4.शोध तकनीकों को अपनाना(introducing operational research techniques)- यह प्रबंध लेखांकन प्रणाली की स्थापना करने की प्रक्रिया का चौथा तथा सबसे महत्वपूर्ण चरण है जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की शोध तकनीकों को अपनाया जाता है।

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