प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन

 

Q.प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन  से आप क्या समझते हैं इसके क्या उद्देश्य हैं? यह कितने प्रकार का होता है नियन्त्रण प्रतिवेदन एवं सूचना प्रतिवेदन में क्या अंतर है एक अच्छे प्रतिवेदन की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन का अर्थ
Meaning of reporting to the management

प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन को अंग्रेजी में reporting to the management कहते हैं। जिसका अर्थ है प्रबन्धकों को किसी चीज की जानकारी, सूचना या विवरण देना।

क्योंकि सामान्यतः व्यवसाय से सम्बन्धित आंकड़ों को संकलित करने का कार्य लेखपालों द्वारा किया जाता है यह आंकड़ों को संकलित करके उन अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करते हैं जो व्यवसाय से सम्बन्धित निर्णय लेते हैं और नीतियों का निर्धारण करते हैं और लेखापालों के इसी कार्य को संवहन के रूप में जाना जाता है और लेखापालों द्वारा संवहन का यह कार्य प्रतिवेदन के द्वारा किया जाता है।

प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन के उद्देश्य , कार्य एवं महत्व
Objectives ,functions and importance of the reporting to the management

1.प्रबन्ध में सहायक (helpful in management )-  प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य प्रबन्ध में सहायता प्रदान करना होता है।

2.नियोजन में सहायक (helpful in planning )- प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन का दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य नियोजन में सहायता प्रदान करना होता है। क्योंकि प्रबन्धकों को द्वारा इन्हीं प्रतिवेदनों के आधार पर भविष्य से सम्बन्धित योजना तैयार की जाती हैं।

3.समन्वय में सहायक (helpful in coordination)- प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन का तीसरा  तथा सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य समन्वय में सहायता प्रदान करना होता है।

4.नियन्त्रण में सहायक (helpful in controlling )- प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन का चौथा तथा सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य नियन्त्रण में सहायता प्रदान करना होता है। क्योंकि इसके द्वारा यह पता लगाया जा सकता है कि किसी भी वस्तु की लागत बढ रही है अथवा घट रही है।
यदि बढ़ रही है तो क्यों बढ़ रही है और यदि घट रही है तो क्यों कट रही है।

5.सूचना प्रदान करने में सहायक- प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन का पांचवा तथा सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य सूचना प्रदान करने में सहायता प्रदान करना होता है।

प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन का वर्गीकरण
Classification of the reporting to the management

प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदनों को निम्नलिखित भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है।

1.उद्देश्य के आधार पर

उद्देश्य के आधार पर प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन निम्नलिखित प्रकार के होते हैं।

1.आन्तरिक प्रतिवेदन - आन्तरिक प्रतिवेदन से आशय ऐसे प्रतिवेदन से है जो कि आन्तरिक प्रबन्ध एवं नियंत्रण से संबंधित होते हैं। तथा जो कि प्रबन्ध , नियोजन, समन्वय एवं नियन्त्रण में सहायता प्रदान करते हैं।

सामान्य प्रतिवेदन - सामान्य प्रतिवेदन से आशय ऐसे प्रतिवेदन से है जो कि व्यवसाय की दैनिक क्रियाओं से सम्बन्धित होते हैं। तथा जिनका प्रयोग सामान्य निर्णय लेने के लिए किया जाता है।

विशिष्ट प्रतिवेदन- विशिष्ट प्रतिवेदन से आशय एसे प्रतिवेदन से है जो कि व्यवसाय की विशेष समस्याओं से सम्बन्धित होते हैं। तथा जिनका प्रयोग विशेष निर्णय लेने के लिए किया जाता है।

प्रबन्धकीय स्तर से सम्बन्धित प्रतिवेदन-

2.बाहृ प्रतिवेदन- बाहृ प्रतिवेदन से आशय एसे प्रतिवेदन से है जो कि किसी भी व्यवसाय के आन्तरिक प्रबन्ध एवं नियंत्रण से संबंधित नहीं होते हैं।

3. प्रबन्धकीय स्तर से सम्बन्धित प्रतिवेदन- प्रबन्धकीय स्तर से सम्बन्धित प्रतिवेदनों को निम्नलिखित भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है।

उच्च स्तरीय प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन - उच्च स्तरीय प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन से आशय ऐसे प्रतिवेदन से है जो कि उच्च स्तरीय प्रबन्ध से सम्बन्धित होते हैं।
उच्च स्तरीय प्रबन्ध के अन्तर्गत owner, chairman, Bod आदि को सम्मिलित किया जाता है।

मध्य स्तरीय प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन  - मध्य स्तरीय प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन से आशय ऐसे प्रतिवेदन से है मध्य स्तरीय प्रबन्ध से सम्बन्धित होते हैं।
मध्य स्तरीय प्रबन्ध के अन्तर्गत marketing, finance, purchase, sales manager आदि को सम्मिलित किया जाता है।

निम्न स्तरीय प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन - निम्न स्तरीय प्रबन्ध हेतु प्रतिवेदन से आशय ऐसे प्रतिवेदन से है निम्न स्तरीय प्रबन्ध से सम्बन्धित होते हैं।
निम्न स्तरीय प्रबन्ध के अन्तर्गत supervisor, foreman आदि को सम्मिलित किया जाता है।

2.प्रकृति के आधार पर

नियन्त्रण प्रतिवेदन- नियन्त्रण प्रतिवेदन से आशय ऐसे प्रतिवेदन से है जो कि व्यवसाय के नियन्त्रण से सम्बन्धित होते हैं।
इस प्रकार के प्रतिवेदन दैनिक ,मासिक अथवा वार्षिक किसी भी आधार पर तैयार किया जा सकते हैं ।
इस प्रकार के प्रतिवेदनों का कोई निश्चित प्रारूप नहीं होता है।
For example:- reports of standard costing.

सूचना प्रतिवेदन- सूचना प्रतिवेदन से आशय ऐसे प्रतिवेदन से है जो कि व्यवसाय से सम्बन्धित महत्वपूर्ण सूचनाओं से संबंधित होते हैं।
इस प्रकार के प्रतिवेदनों का निश्चित प्रारूप होता है।

एक अच्छे प्रतिवेदन के आवश्यक लक्षण या विशेषताएं /
प्रतिवेदन के सिद्धांत
Characteristics of a good report
/principles of the reporting

1.उचित शीर्षक - एक अच्छे प्रतिवेदन में उचित शीर्षक का होना अत्यन्त आवश्यक है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रतिवेदन कहां से प्रारम्भ किया गया है।

2.शुद्धता - एक अच्छे प्रतिवेदन में उचित शुद्धता का होना अत्यन्त आवश्यक है। अर्थात प्रतिवेदन में दी गई सूचनाएं शुद्ध एवं सही होनी चाहिए।

3.सरलता - एक अच्छे प्रतिवेदन में उचित सरलता का होना अत्यन्त आवश्यक है। अर्थात प्रतिवेदन में दी गई सूचनाओं सरल होनी चाहिए ताकि उन्हें आसानी से समझा जा सके और ठीक प्रकार से उपयोग किया जा सके।

4.संक्षिप्तता - एक अच्छे प्रतिवेदन में उचित संक्षिप्तता का होना अत्यन्त आवश्यक है। अर्थात प्रतिवेदन संक्षिप्त होना चाहिए अर्थात उसमें अनावश्यक सूचनाओं को नहीं लिखा जाना चाहिए।

5.पूर्णता- एक अच्छे प्रतिवेदन में उचित पूर्णता का होना अत्यन्त आवश्यक है। अर्थात प्रतिवेदन पूर्ण होना चाहिए।

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