Q.आदर्श नागरिकता के तत्वों या गुणों की विवेचना कीजिए। आदर्श नागरिकता प्राप्त करने के मार्ग में क्या-क्या बाधायें हैं ?
नागरिकता की प्राप्ति
नागरिकता प्राप्त करने की प्रमुख विधियां निम्नलिखित हैं।
1.जन्म द्वारा - यह नागरिकता प्राप्त करने की पहली तथा सबसे महत्वपूर्ण विधि है जिसके अंतर्गत भारत में जन्म लेकर भारत की नागरिकता प्राप्त की जा सकती है।
2.पंजीकरण द्वारा - यह नागरिकता प्राप्त करने की दूसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विधि है जिसके अंतर्गत भारत में पंजीकरण कराकर भारत की नागरिकता प्राप्त की जा सकती है।
3.देशीयकरण द्वारा- यह नागरिकता प्राप्त करने की तीसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विधि है जिसके अंतर्गत किसी अन्य देश की नागरिकता त्याग कर भारत की नागरिकता प्राप्त की जा सकती है।
आदर्श नागरिकता के गुण
आदर्श नागरिकता के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं अर्थात एक आदर्श नागरिक में निम्नलिखित गुणों का होना अत्यंत आवश्यक है।
1.अच्छी शिक्षा - एक आदर्श नागरिक में अच्छी शिक्षा का होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि शिक्षा के बिना एक अच्छे नागरिक और अच्छे राष्ट्र की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
2.अच्छा स्वास्थ्य- एक आदर्श नागरिक में अच्छे स्वास्थ्य का होना अत्यंत आवश्यक है । क्योंकि स्वास्थ्य ही जीवन है।
3.अच्छा चरित्र- एक आदर्श नागरिक में अच्छे चरित्र का होना अत्यंत आवश्यक है।
क्योंकि अंग्रेजी में एक कहावत है कि "यदि संपत्ति गई तो कुछ नहीं गया और यदि स्वास्थ्य गया तो कुछ गया और यदि चरित्र गया तो सब कुछ चला गया।"
4.देशभक्ति की भावना- एक आदर्श नागरिक में देशभक्ति की भावना का होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इसके अभाव में एक अच्छे नागरिक की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
आदर्श नागरिकता प्राप्त करने के मार्ग में बाधायें
आदर्श नागरिकता प्राप्त करने के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधाएं निम्नलिखित हैं।
1.अच्छी शिक्षा का न होना-यदि किसी व्यक्ति में अच्छी शिक्षा का अभाव है तो उसे दशा में उसे एक अच्छा नागरिक बनने के लिए समस्या का सामना करना पड़ता है।
2.अच्छे स्वास्थ्य का न होना- यदि किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा नहीं है तो उस दशा में उसे एक अच्छा नागरिक बनने के लिए समस्या का सामना करना पड़ता है।
3.अच्छे चरित्र का न होना- यदि किसी व्यक्ति का चरित्र अच्छा नहीं है तो उसे दशा में उसे एक अच्छा नागरिक बनने के लिए समस्या का सामना करना पड़ता है।
4.देशभक्ति की भावना का न होना- यदि किसी व्यक्ति के अंदर देशभक्ति की भावना नहीं है तो उसे दशा में उसे एक अच्छा नागरिक बनने के लिए समस्या का सामना करना पड़ता है।
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Q.राज्यपाल की नियुक्ति, कार्यों एवं शक्तियों की विवेचना कीजिए।
राज्यपाल की नियुक्ति
राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
राज्यपाल की योग्यताएं
राज्यपाल की प्रमुख योग्यताएं निम्नलिखित हैं।
1.वह भारत का नागरिक हो ।
2.वह 35 वर्ष की आयु पूरा कर चुका हो।
3.वह किसी सरकारी पद पर कार्य न कर रहा हो।
राज्यपाल का कार्यकाल
राज्यपाल की नियुक्ति 5 वर्ष के लिए की जाती है। और यदि राष्ट्रपति चाहे तो उसे 5 वर्ष की अवधि से पहले भी हटा सकता है।
राज्यपाल का वेतन
राज्यपाल का वेतन 3,50,000 रुपए प्रति माह निर्धारित किया गया है।
राज्यपाल की शक्तियां
भारतीय संविधान द्वारा भारत के राज्यपाल को निम्नलिखित शक्तियां प्रदान की गई हैं।
1. कार्यपालिका शक्ति- भारतीय संविधान द्वारा भारत के राज्यपाल को कार्यपालिका शक्ति प्रदान की गई है जिसके अंतर्गत राज्य सरकार की समस्त करवाई राष्ट्रपति के नाम से ही की जाती है। और वही सभी उच्च अधिकारियों की नियुक्ति करता है।
For example:- मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्री
2. विधायी शक्ति- भारतीय संविधान द्वारा भारत के राज्यपाल को विधायी शक्ति प्रदान की गई है जिसके अंतर्गत वह विधानमंडल के सत्र को बुलाता है।
3. न्यायिक शक्ति- भारतीय संविधान द्वारा भारत के राज्यपाल को न्यायिक शक्ति प्रदान की गई है जिसके अंतर्गत वह किसी व्यक्ति के दंड को कम कर सकता है।
लेकिन राज्यपाल मृत्युदंड को क्षमा नहीं कर सकता है क्योंकि मृत्यु दंड को क्षमा करने की शक्ति केवल और केवल राष्ट्रपति को ही प्राप्त है
Note:- ध्यान देने योग्य बात यह है कि राज्यपाल को राष्ट्रपति के समान ही शक्तियां प्रदान की गई हैं केवल कूटनीतिक सैनिक एवं संकटकालीन शक्तियों को छोड़कर।
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Q.भारत के प्रधानमंत्री की शक्तियों एवं स्थिति की विवेचना कीजिए।
मंत्री परिषद का गठन
मंत्री परिषद का गठन निम्नलिखित तीन प्रकार के मंत्रियों से मिलकर होता है अर्थात मंत्री परिषद में निम्नलिखित तीन प्रकार के मंत्री होते हैं।
1.कैबिनेट मंत्री
2.राज्य मंत्री
3.उप मंत्री
मंत्री परिषद के कार्य
मंत्री परिषद के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं
1.विधायी कार्य - यह मंत्री परिषद का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। जिसके अंतर्गत प्रत्येक बिल संसद में किसी न किसी मंत्री द्वारा ही पेश किया जाता है।
2.प्रशासनिक कार्य - यह मंत्री परिषद का दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। जिसके अंतर्गत मंत्रिपरिषद द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है।
3.वित्तीय कार्य-यह मंत्री परिषद का दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। जिसके अंतर्गत मंत्रिपरिषद द्वारा आर्थिक नीतियों का निर्धारण किया जाता है।
प्रधानमंत्री की नियुक्ति
भारतीय संविधान द्वारा भारत के राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री की नियुक्ति करने का अधिकार दिया गया है। अर्थात भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है।
तथा भारत का राष्ट्रपति ही प्रधानमंत्री के परामर्श पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि वर्तमान समय में हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी हैं।
प्रधानमंत्री की शक्तियां
प्रधानमंत्री की प्रमुख शक्तियां निम्नलिखित हैं।
1.प्रधानमंत्री कैबिनेट का अध्यक्ष होता है।
2.यदि प्रधानमंत्री अपना त्यागपत्र दे देता है तो यह त्यागपत्र संपूर्ण मंत्री परिषद का माना जाता है।
3.प्रधानमंत्री मंत्री परिषद एवं राष्ट्रपति के बीच का सेतु (पुल) होता है।
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Q.भारत के सर्वोच्च न्यायालय के संगठन की विवेचना कीजिए ? सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार को विस्तार से लिखें।
सर्वोच्च न्यायालय का गठन
सर्वोच्च न्यायालय को अंग्रेजी में supreme court कहते हैं जिसे उच्चतम न्यायालय के नाम से भी जाना जाता है जो कि भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है।
वर्तमान समय में उच्चतम न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश तथा 33 अन्य न्यायाधीश हैं जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
न्यायाधीशों की योग्यताएं
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की प्रमुख योग्यताएं निम्नलिखित हैं।
1.वह भारत का नागरिक हो
2.वह किसी उच्च न्यायालय में कम से कम 5 वर्षों तक न्यायाधीश रह चुका हो
3.वह राष्ट्रपति की दृष्टि में कानून का ज्ञाता हो
न्यायाधीशों का कार्यकाल
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति 65 वर्ष तक की आयु के लिए की जाती है और यदि राष्ट्रपति चाहे तो उन्हें 65 वर्ष की आयु से पहले भी हटा सकता है।
न्यायाधीशों का वेतन
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का वेतन 2,80,000 रुपए प्रति माह निर्धारित किया गया है तथा सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों का वेतन 2,50,000 रुपए प्रति माह निर्धारित किया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार
सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार को निम्नलिखित भागों में बांटा जा सकता है।
1.प्रारंभिक क्षेत्राधिकार - भारतीय संविधान द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को प्रारंभिक क्षेत्राधिकार दिया गया है जिसके अंतर्गत वह दो या दो से अधिक राज्यों के मध्य उत्पन्न होने वाले विवादों का निपटारा कर सकता है।
2.अपील का अधिकार- भारतीय संविधान द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को अपील का अधिकार दिया गया है जिसके अंतर्गत वह निम्नलिखित अपीलें सुन सकता है।
दीवानी अपीलें - भारतीय संविधान द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को दीवानी अपीलें सुनने का अधिकार दिया गया है जिसके अंतर्गत वह दीवानी अपीलें सुन सकता है।
फौजदारी मामले- भारतीय संविधान द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को फौजदारी मामले सुनने का अधिकार दिया गया है जिसके अंतर्गत वह फौजदारी मामले सुन सकता है।
संवैधानिक अपीले़- भारतीय संविधान द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को संवैधानिक अपीले़ सुनने का अधिकार दिया गया है जिसके अंतर्गत वह संवैधानिक अपीले़ सुन सकता है।
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Q. "भारतीय संविधान अर्द्ध संघात्मक है। यह न तो पूर्णतः संघात्मक है और न ही एकात्मक, बल्कि दोनों का मिला- जुला रूप है।" इस कथन की व्याख्या कीजिए।
प्रकृति के आधार पर संविधान निम्नलिखित दो प्रकार का होता है
1.संघात्मक संविधान - संघात्मक संविधान की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है।
संघात्मक संविधान के अंतर्गत शासन की समस्त शक्तियां केंद्र तथा राज्य सरकार दोनों के बीच बंटी हुई होती हैं।
संघात्मक संविधान के अंतर्गत केंद्र अपनी इच्छा के अनुसार कानून नहीं बना सकती है।
संघात्मक संविधान लिखित हो सकता है।
संघात्मक संविधान में संशोधन करना काफी कठिन है।
2.एकात्मक संविधान- एकात्मक संविधान की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है।
एकात्मक संविधान के अंतर्गत समस्त शक्तियां केंद्र सरकार के हाथ में होती हैं।
एकात्मक संविधान के अंतर्गत केंद्र अपनी इच्छा के अनुसार कानून बना सकती है
एकात्मक संविधान लिखित अथवा अलिखित किसी भी प्रकार का हो सकता है।
एकात्मक संविधान में संशोधन करना काफी सरल है।
भारतीय संविधान की प्रकृति के बारे में विभिन्न विद्वानों में भिन्न-भिन्न मतभेद रहे हैं क्योंकि कुछ विद्वानों का मानना है कि भारतीय संविधान पूर्ण संघात्मक है तथा कुछ विद्वानों का मानना है कि भारतीय संविधान अर्द संघात्मक है।
कुछ विद्वानों के अनुसार भारतीय संविधान अर्द संघात्मक है इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।
1. आपात की घोषणा- भारत के संविधान द्वारा भारत के राष्ट्रपति को आपात (emergency)की घोषणा करने का अधिकार दिया गया है अर्थात वह भारतीय संविधान के अंतर्गत आवश्यकता पड़ने पर आपात की घोषणा कर सकता है।
For example
Financial emergency, National emergency, राष्ट्रपति शासन
2. राज्यपाल की नियुक्ति- भारतीय संविधान द्वारा भारत के राष्ट्रपति को राज्यपाल की नियुक्ति करने का अधिकार दिया गया है ।
3. नए राज्यों का निर्माण- भारतीय संविधान द्वारा भारतीय संसद को
नए राज्यों का निर्माण करने का अधिकार दिया गया है।
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