अकबर की धार्मिक नीति

 Q.अकबर की धार्मिक नीति की विवेचना कीजिए।

Answer:- अकबर का पूरा नाम जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर था। उनके पिता का नाम हुमायूँ तथा माता का नाम हमीदा बानो था। पिता की मृत्यु के समय अकबर केवल तेरह वर्ष का था। हुमायूँ के विश्वास पात्र वैरम खाँ ने अकबर का राज्याभिषेक किया। उसके पश्चात्अ अपने संरक्षक बैरम खाँ की देख-रेख में राज-काज करने लगा। 



अकबर का शारीरिक गठन - 


अकबर की आकृति सुन्दर एवं व्यक्तित्व प्रभावशाली था। थे। जहाँगीर अनुसार- "उसके शरीर का आकार मध्यम श्रेणी का था, परन्तु कुछ लम्बा ही प्रतीत होता था। उसका रंग गेहुँआ था, उसकी आँखें और भौहें काली थी, उसका रंग रूप साफ होने की अपेक्षा कुछ साँवला था। उसका शरीर सिंह के समान था, छाती चौड़ी थी, उसके हाथ तथा भुजायें लम्बी थीं।" 


बाबर (मुगल साम्राज्य का संस्थापक)

हुमायूँ


अकबर

जहाँगीर (सलीम)

शाहजहाँ

औरंगज़ेब


प्रसिद्ध विद्वानों के अनुसार- "उसके कन्धे चौड़े थे, उसकी टाँगें कुछ झुकी हुई थीं, जिससे घोड़े की सवारी में उसे विशेष सुविधा होती थी।  उसकी आँखें सागर के समान चमकती थीं, अपने पूर्वजों के समान वह अपने सिर के बाल उस्तरे से नहीं बनवाता था। वह टोपी नहीं पहनता था किन्तु साफा अवश्य बाँधता था। कुछ लोगों का मानना है कि वह भारतीय प्रथा के अनुसार साफा इसलिये बाँधता था कि इससे भारतीय संतुष्ट हो जायें। वह अपने बायें पैर को तनिक घसीट कर चलता था मानो पैर में कोई खराबी हो लेकिन वास्तव में ऐसी कोई बात नहीं थी। उसके शरीर की बनावट अच्छी थी।" 



 (2) शारीरिक शक्ति - अकबर में शारीरिक शक्ति बहुत थी। एक बार उसने एक रात और एक दिन में अजमेर से आगरा 240 किलोमीटर दूर घोड़े पर सवार होकर यात्रा पूरी की थी। युद्ध स्थल में वह अपने शौर्य का प्रदर्शन किया करता था। वह लगातार कई घंटे काम कर लेता था। 


(3) भोजन-अकबर काफी  कम खाने वाला था। उसने मांसाहार बिल्कुल त्याग दिया था। भोजन में उसके सामने अनेक प्रकार के भोजन उपस्थित रहते थे। वह फल बड़े चाव से खाता था। हिन्दू रानियों के प्रभाव से उसने मांस, लहसुन तथा प्याज त्याग दिया था। वह पानी के बर्तन को इस प्रकार बन्द करता था ताकि उसमें कोई विष न मिला सके। युवावस्था में वह शराब का आदि था किन्तु बाद में उसने इसका प्रयोग बहुत कम कर दिया था। 


(4) दिनचर्या-अकबर का जीवन बड़ा संयमित था। वह बहुत कम सोता था। सोते समय भी वह बहुत सावधान रहा करता था। वह समय को बड़ी सावधानी से विभाजित कर लिया करता था। एकान्त में बैठकर आध्यात्मिक प्रश्नों पर विचार किया करता था। प्रातः काल उठकर वह प्रजा को झरोखा दर्शन दिया करता था। दिन में व्यस्त रहता था। 


(5) स्वभाव-अकबर बड़ा मिलनसार व्यक्ति था। वह हर समय चित्त से प्रसन्न रहा करता था। वह हास्य विनोद में भी भाग लिया करता था। वह हर व्यक्ति से बड़े प्रेम से मिलता था और उनसे मधुर भाषा में बात किया करता था। इतना नम्र स्वभाव होते हुये भी उसका स्वभाव कभी-कभी इतना कठोर हो जाता था कि भयानक परिणाम हो जाता था। 



(6) कौटुम्बिक प्रेम-अपने सगे सम्बन्धियों एवं कुटुम्बियों के साथ उसका व्यवहार अत्यन्त प्रेम-पूर्ण था। वह इस बात पर शोक प्रकट किया करता था कि उसके पिता का इतने पहले देहान्त हो गया था और वह उसकी सेवा न कर सका। उसने अपने भाई मिर्जा हकीम के साथ उदारता दिखायी। अपने पुत्र सलीम को कई बार विद्रोह करने पर भी माफ़ कर दिया था। अपने अभिन्न मित्र अबुल फजल की मृत्यु पर वह फूट-फूटकर रोया था। 


(7) अभिरुचि-आखेट में उसे बड़ा आनन्द आता था। वह सिंह, चीते तथा हाथियों के शिकार से भी नहीं घबराता था। उसे हाथियों का युद्ध बहुत प्रिय था। वह पोलो खेलने का भी शौकीन था। कभी-कभी तो वह रात में प्रकाश जलाकर खेला करता था। 


(8) मानसिक शक्ति-पढ़ा-लिखा न होने पर अकबर साहित्यिक तथा धार्मिक वाद-विवाद में पूर्ण रूप से भाग लिया करता था। उसकी बुद्धि बड़ी विकसित थी। उसकी याददाश्त भी बड़ी विलक्षण थी जटिल-से-जटिल समस्याओं को भी सफलतापूर्वक हल कर लेता था। वह कानों से सुनकर ही इतना याद कर लेता था कि जितना आँखों से देखकर भी नहीं याद किया जा सकता था। उसे दर्शन शास्त्र, धर्म शास्त्र, इतिहास तथा राजनीति का अच्छा ज्ञान था। 



अकबर की धार्मिक नीति की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित थीं।




1. धार्मिक सहिष्णुता :- अकबर की धार्मिक नीति की पहली तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि अकबर ने सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता की नीति अपनाई। और किसी भी धर्म के पालन में हस्तक्षेप नहीं किया।


2. जज़िया कर की समाप्ति:- अकबर की धार्मिक नीति की दूसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि अकबर ने गैर-मुसलमानों पर लगाया जाने वाला जज़िया कर समाप्त कर दिया।



3. तीर्थयात्रा कर की समाप्ति:-अकबर की धार्मिक नीति की  तीसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि 

अकबर ने हिंदुओं पर लगने वाला तीर्थयात्रा कर भी समाप्त कर दिया गया।



4. राजपूतों के साथ धार्मिक समन्वय:-अकबर की धार्मिक नीति की  चौथी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि अकबर ने राजपूतों से वैवाहिक संबंध स्थापित किए। लेकिन फिर भी उनके धर्म में हस्तक्षेप नहीं किया।

यह नीति हिंदू–मुस्लिम एकता को मजबूत करती थी।


5. इबादतखाना की स्थापना:-अकबर की धार्मिक नीति की  पांचवी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि  

अकबर ने फतेहपुर सीकरी में इबादतखाना स्थापित किया।

यहाँ विभिन्न धर्मों के विद्वानों—हिंदू, मुस्लिम, जैन, ईसाई—के बीच धार्मिक व दार्शनिक चर्चा होती थी।


6. मज़हबी कट्टरता का विरोध:-अकबर की धार्मिक नीति की छठी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि  

अकबर ने कट्टर उलेमाओं के प्रभाव को सीमित किया।



7. दीन-ए-इलाही की स्थापना :-अकबर की धार्मिक नीति की सातवीं तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि  

अकबर ने विभिन्न धर्मों के श्रेष्ठ तत्वों को मिलाकर दीन-ए-इलाही नामक नया विचार प्रस्तुत किया।

यह कोई संगठित धर्म नहीं बल्कि नैतिक जीवन पद्धति थी। इसके अनुयायी बहुत कम थे।


8. धार्मिक समानता और नैतिक शासन:-अकबर की धार्मिक नीति की आठवीं तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि अकबर का मानना था कि राजा सभी धर्मों से ऊपर होता है।

राज्य का आधार न्याय, नैतिकता और जनकल्याण होना चाहिए, न कि किसी एक धर्म का प्रभुत्व।

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