शिवाजी/मराठा
Q.शिवाजी के प्रशासन की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें।
Answer:-शिवाजी का जन्म शिवनेर के दुर्ग/मजबूत किला में हुआ था। इनके पिता का नाम शाहजी भोंसले और माता का नाम जीजाबाई था।
शिवाजी ने सूरत पर आक्रमण करके बहुत सारी सम्पत्ति इकट्ठी कर ली। शिवाजी का रायगढ़ में एक पंडित ने राज्याभिषेक किया था जिसमें उन्हें छत्रपति की उपाधि से नवाजा गया था।
1680 ई० में शिवाजी की मृत्यु हो गयी।
शिवाजी एक कुशल सैनिक, योग्य सेनापति तथा लोकप्रिय शासक थे। शिवाजी ने अपनी योग्यता के आधार पर मराठों को संगठित किया तथा अलग से एक 'मराठा राज्य' की स्थापना की।
शिवाजी के प्रशासन की विशेषताएं
शिवाजी के प्रशासन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं।
1.केन्द्रीय शासन-शिवाजी के प्रशासन की पहली तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि शिवाजी ने एक निरंकुश राजतन्त्र की स्थापना की थी । लेकिन फिर उसके पश्चात् उनकी शासन-प्रणाली आधुनिक मन्त्रिमण्डल की भाँति थी।
2.प्रान्तीय शासन - शिवाजी के प्रशासन की दूसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि धीरे -धीरे शिवाजी का राज्य अधिक विस्तृत हो गया था
अतः अच्छी तरीके से शासन को चलाना काफी कठिन हो गया था ।
इसीलिए शासन की सुविधा के लिये उसे चार भागों में बांटा गया था।यह भाग प्रान्त कहलाते थे।
3.स्थानीय शासन -शिवाजी के प्रशासन की तीसरी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि प्रत्येक प्रान्त में ग्रामीण समुदाय था। जो पूर्ण रूप से स्वतन्त्र था। उनकी व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। प्रारम्भ में ग्राम समूहों पर देशमुख तथा देशपाण्डों की नियुक्ति की गई थी परन्तु बाद में जब उसकी शक्ति काफी बढ़ गई तो शिवाजी ने लगान वसूल करने के लिये अपने कर्मचारियों की नियुक्ति की। प्रत्येक प्रान्त अनेक परगना में बंटा हुआ था।
4. सेना की व्यवस्था - शिवाजी के प्रशासन की चौथी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि शिवाजी की सेना बहुत संगठित तथा अनुशासन वाली थी। सैनिक सुधारों की ओर उन्होंने ध्यान दिया था। एक स्थायी सेना की व्यवस्था की थी। जागीर प्रथा का अन्त करके सैनिकों को वेतन देने की व्यवस्था की गई थी। घोड़ों की भर्ती सेना में योग्यता के आधार पर होती थी।
5. दुर्गों/किलों की व्यवस्था - शिवाजी के प्रशासन की पांचवी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि शिवाजी ने नये दुर्गों को बनवाने और पुराने दुर्गों की मरम्मत कराने का प्रयास किया था। प्रत्येक दुर्ग के प्रबन्ध के लिये तीन कर्मचारी होते थे, जिनका उत्तरदायित्व सामूहिक होता था। हवलदार दुर्ग की चाबी रखता था ।
6.रणनीति - शिवाजी के प्रशासन की छठी तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि शिवाजी की रणनीति छापामार रणनीति थी। वह शत्रु पर अचानक आक्रमण कर देते थे। लूटमार मचाकर पहाड़ियों पर भाग जाते थे। अपनी सेना को वे छोटी-छोटी टुकड़ियों में बाँट लेते थे जिससे सेना का संचालन बड़ी तीव्र गति से किया जा सकता था।
7.भूमिकर-शिवाजी के प्रशासन की सातवीं तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि प्रत्येक गाँव का क्षेत्रफल का लेखा रखा जाता था और प्रत्येक बीघे की उपज का अनुमान लगाया जाता था। उपज का 2/5 भाग राज्य ले लेता था और शेष भाग किसान के पास रहता था। भूमिकर नगद अथवा अन्न के रूप में सरकारी अधिकारी वसूल करते थे। वे जमींदारों की प्रथा के विरुद्ध थे। वे नहीं चाहते थे कि जमींदार किसानों पर राजनीतिक प्रभुत्व रखें। शिवाजी के समय में भूमिकर के अतिरिक्त आयात कर, निर्यात कर तथा चुंगी कर अवश्य रहे होंगे।
8.न्याय-व्यवस्था-शिवाजी के प्रशासन की आठवीं तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि शिवाजी के साम्राज्य में न्याय की उचित व्यवस्था नहीं थी। और न्याय कठोर तथा अव्यवस्थित था।
9.धार्मिक नीति-शिवाजी के प्रशासन की नौवीं तथा सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि कट्टर हिन्दू होते हुये भी शिवाजी दूसरे धर्मों का सम्मान करते थे। उन्होंने मुसलमानों को धार्मिक विचार तथा नामज का पूरी स्वतन्त्रता दे रखी थी। वे उनके पीरों और मस्जिदों का आदर करते थे। हिन्दू मन्दिरों के साथ-साथ मुसलमान फकीरों और पीरों को भी आर्थिक सहायता देते थे। वे कुरान का सम्मान रूप से आदर करते थे।
Comments
Post a Comment