ब्रह्म समाज/राजा राममोहन राय

 Q.ब्रह्म समाज पर विस्तृत आलेख लिखिए 


भूमिका (Introduction)


ब्रह्म समाज आधुनिक भारत का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन था। इसकी स्थापना राजा राममोहन राय ने 20 अगस्त 1828 को कोलकाता में की थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य हिंदू धर्म में व्याप्त कुरीतियों को दूर करना तथा महिला अधिकारों को बढ़ावा देना था।


राजा राममोहन राय का परिचय


राजा राममोहन राय को 'आधुनिक भारत का जनक' माना जाता है। उनका जन्म 22 मई 1772 को बंगाल के राधा नगर गाँव में हुआ था। उन्हें संस्कृत, अरबी, फारसी, अंग्रेजी और लैटिन जैसी भाषाओं का गहरा ज्ञान था।

उन्होंने वेदों और उपनिषदों का गहन अध्ययन किया था और यह निष्कर्ष निकाला कि हिंदू धर्म का मूल आधार एकेश्वरवाद है।

उनके प्रयासों के कारण ही सती प्रथा पर कानूनी रोक लगाई गई थी।

तथा इन्होंने बहु-विवाह, बाल-विवाह, जाति-प्रथा, पर्दा-प्रथा तथा विधवा-विवाह निषेध प्रथा का भी घोर विरोध किया। 


ब्रह्म समाज की स्थापना


ब्रह्म समाज की स्थापना राजा राममोहन राय ने 20 अगस्त 1828 को कोलकाता में की थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य हिंदू धर्म में व्याप्त कुरीतियों को दूर करना तथा महिला अधिकारों को बढ़ावा देना था।

बाद में इस संस्था को देवेन्द्रनाथ टैगोर और केशवचन्द्र सेन ने आगे बढ़ाया।


ब्रह्म समाज के सिद्धांत


ब्रह्म समाज के प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं:


1. ईश्वर एक है।

2.जीवात्मा अमर है।

3.ईश्वर की पूजा आत्मा की शुद्धता के साथ करनी चाहिए।

4.सभी धर्मों के उपदेश सत्य हैं, उनसे शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए।

5.ईश्वर के प्रति पितृ-भावना, मनुष्य जाति के प्रति भ्रातृ-भावना तथा प्राणी-मात्र के प्रति दया-भावना रखना ही परम धर्म है।

6.ईश्वर की आराधना करने का सभी वर्णों एवं जातियों को समान अधिकार है।

7.ईश्वर सबकी प्रार्थना सुनता है और पाप-पुण्य के अनुसार दण्ड अथवा पुरस्कार देता है।


 ब्रह्म समाज के कार्य


ब्रह्म समाज के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं।


1.जाति-प्रथा का विरोध:-ब्रह्म समाज का पहला तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य जाति-प्रथा का विरोध करना था।

जाति-प्रथा का अर्थ है समाज का जन्म के आधार पर अलग-अलग जातियों में बँट जाना और भेदभाव होना।


2.धर्म परिवर्तन को रोकना:-ब्रह्म समाज का दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य धर्म परिवर्तन को रोकना था।

अर्थात् इन्होंने देश के लाखों लोगों को धर्म परिवर्तन करने से बचा लिया।



3.महिला शिक्षा और अधिकार को बढ़ावा देना:- ब्रह्म समाज का तीसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य महिला शिक्षा और अधिकार को बढ़ावा देना था।

अर्थात् इन्होंने विधवा विवाह का समर्थन किया और लड़कियों की शिक्षा के लिए स्कूल खोले।


4.बाल-विवाह का विरोध:-ब्रह्म समाज का चौथा तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य बाल-विवाह का विरोध करना था।

बाल-विवाह का अर्थ है बच्चों का बहुत कम उम्र में विवाह कर देना।


5.बहु-विवाह का विरोध:-ब्रह्म समाज का पांचवा तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य बहु-विवाह का विरोध करना था।

बहु-विवाह का अर्थ है एक पुरुष का एक से अधिक पत्नियाँ रखना।

लेकिन इस दौरान लड़कियां लड़कों की तरह बहु विवाह नहीं कर सकती थीं


6.पर्दा-प्रथा का विरोध:-ब्रह्म समाज का छठा तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य पर्दा-प्रथा का विरोध करना था।

पर्दा-प्रथा का अर्थ है महिलाओं का चेहरा और शरीर ढककर सार्वजनिक रूप से अलग रहना।


7.सती प्रथा का अंत:-ब्रह्म समाज का सातवां तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य सती प्रथा का अंत करना था।

सती प्रथा वह प्रथा थी जिसमें पति की मृत्यु के पश्चात उसकी पत्नी को जलकर मरने के लिए मजबूर किया जाता था।


8.विधवा-विवाह निषेध प्रथा का विरोध:-ब्रह्म समाज का आठवां तथा सबसे महत्वपूर्ण कार्य विधवा-विवाह का विरोध करना था।

विधवा-विवाह निषेध प्रथा का अर्थ है पति की मृत्यु के बाद विधवा स्त्री को पुनर्विवाह की अनुमति न देना।



निष्कर्ष (Conclusion)


ब्रह्म समाज ने सोए हुए भारतीय समाज में चेतना जगाने का कार्य किया। तथा सामाजिक सुधारों की मजबूत नींव तैयार की।


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