दण्ड
प्रश्न: भारत के लिये दंड का कौन सा सिद्धान्त उपयुक्त है?
दण्ड का अर्थ (विधि)
राज्य द्वारा निर्मित कानूनों का पालन करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य है और यदि कोई व्यक्ति इन कानूनों का पालन करने में असमर्थ रहता है तो उस दशा में उसे दंडित किया जा सकता है। भारत में यदि कोई व्यक्ति अपराध करता है तो उसे कितना दंड दिया जायेगा यह भारत की दंड विधि में लिखा हुआ होता है।
दंड को अंग्रेजी में Punishment कहते हैं जिसका अर्थ है सजा।
दंड की परिभाषा
दंड की प्रमुख परिभाषा निम्नलिखित है —
प्रसिद्ध अपराधशास्त्री के अनुसार:— दंड एक प्रकार की सामाजिक प्रताड़ना है और इसमें यह आवश्यक है कि पीड़ा हो।
दंड के उद्देश्य
दंड के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं —
1.प्रतिशोध:- दण्ड का प्रमुख उद्देश्य अपराधी को यह अनुभूति/याद कराना होता है कि अपराध करना एक मंहगा सौदा है और वह उसकी पुनरावृत्ति करने का दु-साहस ना करे।
2.प्रतिरोधात्मक प्रभाव:- दण्ड का प्रमुख उद्देश्य अपराधी को कारागार में प्रतिरोध कर उसकी समाज में अपराध करने की क्षमता को बन्दीकरण द्वारा समाप्त करना होता है।
3.प्रत्यावर्तन:- छोटे अपराधियों के लिए दण्ड जुर्माने के रूप में दिया जा सकता है या अपराधी को आदेशित किया जा सकता है कि वह पीड़ित व्यक्ति को प्रतिकर देकर उसकी क्षतिपूर्ति करे।
4.पुनर्वास:- दण्ड का प्रमुख उद्देश्य अपराधी की मनोवृत्ति में सुधार कर उसे समाज में पुनः स्थापित करना होता है।
दण्ड के प्रमुख सिद्धान्त
दण्ड के निम्नलिखित पाँच सिद्धान्तों को सुप्रीम कोर्ट ने जेकब जॉर्ज बनाम केरल राज्य मामले में मान्यता दी।
1.प्रतिशोधकारी सिद्धान्त:यह सिद्धान्त इस मान्यता पर आधारित है कि दण्ड से ही प्रतिशोध की भावना संतुष्ट होती है।
• उदाहरण: प्राचीन समय में "आँख के बदले आँख और दाँत के बदले दाँत" का नियम था।
आलोचना:
यह सिद्धान्त अव्यावहारिक है क्योंकि इसमें अपराधी के सुधार के लिए कोई स्थान नहीं है।
2.प्रायश्चितकारी सिद्धान्त:यह इस मान्यता पर आधारित है कि प्रायश्चित (दण्ड) से अपराधी का शुद्धिकरण हो जाता है।
• उदाहरण: हिन्दू विधि शास्त्रियों की राय में प्रायश्चित पाप को धोकर साफ़ कर देता है।
3.प्रतिरोधक सिद्धान्त:इस सिद्धान्त के अनुसार, अपराधी को दिया जाने वाला दण्ड इस प्रकार का होना चाहिए कि अन्य व्यक्ति इससे भयभीत हो सकें और अपराध से दूर रह सकें।
For example• अपराधी को खुले स्थान में फाँसी देना।
• कोड़े लगाना।
• उबलते पानी में डालना
• दीवार में जिन्दा चुनवा देना आदि।
अपराध रोकने में यह सिद्धान्त बहुत अधिक प्रभावकारी नहीं है।
For exp:-महारानी एलिजाबेथ के समय जेब काटने के लिए मृत्युदण्ड।
4.निरोधात्मक सिद्धान्त :- यह सिद्धान्त इस मान्यता पर आधारित है कि अपराधी को अपराध करने से रोकने के लिए उसे समाज से पृथक कर दिया जाना चाहिए। जिससे समाज सुरक्षित हो सके।
For example:-अपराधी को कारागार में डालना व नपुंसक बना देना।
अपराध रोकने में यह सिद्धान्त बहुत अधिक प्रभावकारी नहीं है। क्योंकि इसके पश्चात् व्यक्ति निर्लज्ज हो जाता है। और यह महसूस करता है कि वह अपराध की पुनरावृत्ति /फिर से अपराध करने के लिए स्वतंत्र हो चुका है।
5.सुधारात्मक सिद्धान्त :-यह सिद्धान्त इस मान्यता पर आधारित है कि अपराधी को सुधारकर उसका इलाज करना चाहिए क्योंकि अपराधी का भी समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।
For Example :- महर्षि वाल्मीकि, अंगुलिमाल इसके लिए अपराधियों को कारागार में अनेक प्रकार का ज्ञान दिया जाता है।महात्मा गांधी के अनुसार — "अपराध से घृणा करो अपराधी से नहीं।"
आलोचना
1. इसके लिए कारावास गृह को सुखद आवास में बदलना होगा।
2. आपराधिक प्रवृतियों के व्यक्ति पर सुधार की कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
3. इससे अपराध करना एक लाभदायक धन्धा बन जायेंगे।
निष्कर्ष :-आज के समय में दंड का सुधारात्मक सिद्धान्त ही अधिक उपयोगी माना गया है।
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